अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल की छवि एक ऐसे नेता ही है, जिन्होंने केंद्र सरकार में मंत्री रहते हुए भी सामाजिक न्याय के मुद्दे पर सरकार के गलत कामों की खिंचाई करने में कभी कोई कसर नहीं छोड़ी.
सुज़ुकी का आधे कार बाज़ार पर कब्ज़ा है, चीनियों का मोबाइल फोन क्षेत्र पर और कोरियाइयों का उपभोक्ता सामान सेक्टर पर. और एतिहाद शायद जेट को उड़ाने लगे. विदेशी खिलाड़ियों के बिना भला हम कहां रहेंगे?
उद्योगपति अनिल अंबानी व एरिक्सन मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर कर्ज़मंद किसानों ने गुहार लगानी शुरू कर दी है कि उन्हें भी ऐसी सजा से नवाज़ा जाय.
मुलायम सिंह जो कर रहे हैं, उससे सपा और बसपा की चुनावी संभावनाओं पर बुरा असर पड़ सकता है. इसका ज्यादा नुकसान बीएसपी को होगा, क्योंकि सपा में फैली उलझन के कारण सपा का वोट बीएसपी को ट्रांसफर नहीं हो पाएगा.
आत्मबोधानंद उन्हीं चार मांगों पर अनशन कर रहे हैं जिन पर अडिग जीडी अग्रवाल ने शहादत दे दी थी, पर सरकार केवल सफल कुंभ के आयोजन व नमामि गंगे के प्रचार से काम चला रही है. उसने अभी तक उनसे बात भी नहीं की है.
1977 के बाद देश के तमाम राज्यों में क्षेत्रिय दलों का तेज़ी से उभार शुरू हो गया. इन दलों ने उन क्षेत्रिय मुद्दों और समस्याओं के आधार पर जनप्रचार कर जनाधार बनाना शुरू कर दिया.
नरेंद्र मोदी ने सऊदी अरब से भारत के रिश्ते में पाकिस्तान और पुलवामा के नाम पर खटास न देकर समझदारी ही दिखाई. वे मनमोहन सिंह की पहल को ही जोरदार ढंग से आगे बढ़ा रहे हैं.
पहली बार देश में ये माना गया है कि कोई व्यक्ति जाति और धर्मविहीन हो सकता है. सरकार ने इसका सर्टिफिकेट जारी किया है. ये एक बड़ी सामाजिक क्रांति की शुरुआत हो सकती है.
अमेरिका के लक्ष्य अधूरे रह गए, अब उसके पास न तो इतनी ताकत है और न इतना जोश है कि वह युद्ध फिर शुरू कर सके; और ईरान? घुटने टेकने की जगह वह पूरे संकल्प के साथ लड़ा. उसकी बागडोर अब ज्यादा कट्टरपंथी लोगों के हाथ में है