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Saturday, 18 April, 2026
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मत-विमत

बाबा साहेब से जुड़ गई है रविदास की वैश्विक परंपरा

रैदास ने भारतीय समाज की बुराइयों को खत्म करके एक आदर्श समाज बनाने की कल्पना की थी, जहां किसी को कोई कष्ट न हो. टेक्स्ट बुक में उनके बारे में खामोश हैं.

जब मुम्बई में दीये से लड़कर हार गया था तूफान!

जार्ज फर्नांडिस ने 48.5 प्रतिशत वोट के साथ मुंबई में एस. के. पाटिल को 40 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. जार्ज की इस जीत ने सिद्ध किया था कि प्रतिद्वंद्वी कितना भी मजबूत क्यों न हो, बिना साधन वाला व्यक्ति भी युक्ति से हरा सकता है.

इमरान ख़ान एक जिहादी टाइम बम पर बैठे हुए हैं, पुलवामा हमले के सबूत मांगना महज बहानेबाज़ी है

दुनिया के अधिकतर देश पाकिस्तान के आचरण को समझते हैं, और यह मौलाना मसूद अज़हर के खिलाफ कार्रवाई की लगभग सार्वभौम मांग से स्पष्ट है.

पाकिस्तानी खिलाड़ियों को बैंक बैलेंस बढ़ाना आता है, आतंकी हमले पर ग़म जताना नहीं

आए दिन पाकिस्तान के जो खिलाड़ी ये कहते रहते थे कि उन्हें हिन्दुस्तान में सबसे ज्यादा प्यार मिला है, आतंकी हमले पर बोलने से उनकी जुबां किसने सिल दी है?

क्या मुलायम सिंह नहीं चाहते कि मायावती और अखिलेश साथ आएं?

राजनीति सत्ता का खेल और इसमें सिद्धांतों की बात बेमानी है. मुलायम सिंह इस बात को न सिर्फ मानते हैं, बल्कि इस पर अमल भी करते हैं.

कैसे पुलवामा जैसे हमले उदारपंथियों के पैर में फंदा डाल देते हैं

भाजपा नेतृत्व वाली सरकार देश की सीमा की सुरक्षा का जिम्मा लेती है जबकि उदारपंथी मानवाधिकारों का ज़िम्मा उठाते हैं.

टेस्ट क्रिकेटर की मोहर लगने से क्यों बचते हैं भारतीय बल्लेबाज़?

कड़वी सच्चाई यही है कि भारत ने आईपीएल को काफी महत्व दिया जाता है. कोई नहीं चाहता कि महान टेस्ट बल्लेबाज़ बनने की चाहत में वो आईपीएल खेलने से चूक जाए.

महिला आरक्षण से क्या हासिल करना चाहते हैं राहुल गांधी

महिला आरक्षण विधेयक को मौजूदा स्वरूप में पारित करने से ओबीसी और माइनॉरिटी के लोग नाराज हो सकते हैं. लेकिन हर हाथ में बताशा रखने की होड़ में राहुल गांधी ये जोखिम उठा रहे हैं.

सेना को ‘खुली छूट’ का मतलब और सरकार का दायित्व

भारत में सेना सरकार के निर्देशन में काम करती है. इस मामले में भारत की स्थिति पाकिस्तान से अलग है, जहां सेना ही सरकार को संचालित करती है. भारत में फैसले सरकार को ही लेने होंगे.

भारत में अमीरी-गरीबी के बढ़ते भेद से दुनिया को सिरदर्द क्यों है?

आर्थिक असमानता बढ़ने की वजह से भारत में राजनीतिक पार्टियों, न्यायालयों, विश्वविद्यालयों, मीडिया समेत तमाम संस्थाओं पर कुछेक परिवारों का कब्जा होता चला जा रहा है. इससे जनता का लोकतंत्र पर भरोसा कम हो रहा है.

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वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल या रमेश चेन्निथला—केरल में कांग्रेस का सीएम चेहरा कौन होगा?

कांग्रेस के नज़रिए से, इस समय केरल के लिए सबसे आदर्श मुख्यमंत्री कौन होगा? यह शशि थरूर ही होने चाहिए, क्योंकि वे मुख्यमंत्री पद के लिए ज़रूरी सभी पैमानों पर खरे उतरते हैं.

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रोबोटिक सर्जरी से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवा की खाई पाटने में मदद मिलेगी: विशेषज्ञ

(मनीष श्रीवास्तव) भोपाल, 18 अप्रैल (भाषा) रोबोटिक चिकित्सा मामलों के एक विशेषज्ञ ने शनिवार को कहा कि रोबोटिक सर्जरी में प्रगति से अत्याधुनिक...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.