विदेश मंत्रालय ने रूस के साथ व्यापार को लेकर अपनाए जा रहे दोहरे मानदंडों को उजागर किया और कहा कि भारत अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा.
तीन कारकों—राजनीतिक समर्थन, कलेक्टर के कार्यालय का एक 'लिसनिंग पोस्ट' (सूचना केंद्र) के रूप में कार्य करना, और उग्रवाद-विरोधी अभियानों में हस्तक्षेप न करना—ने यह सुनिश्चित किया कि दंतेवाड़ा अभियान सफल रहा.