मत-विमत

न्यायपालिका को न्यायाधीशों से भी बचाएं

अधिकारों को लेकर खींच-तान से लेकर,सुर्ख़ियों में रहने और अपनी ही सभा को संभालने की असमर्थता तक -न्यायापालिका अब अपने ही भीतर से खतरे में आ गई है बासु भट्टाचार्य की 1971 में आई फिल्म...

क्या ‘पिंक’ के बाद महिलाओं के लिए लड़-लड़ के थक चुके हैं अमिताभ बच्चन ?

ये बहुत ही अनुचित है। मीडिया यह भूलते हुए दिखाई देती है कि वो पिंक को नहीं 102 नॉट आउट को बढ़ावा दे रहे हैं। ये 2016 में था और क्या अमित जी ने इसके लिए अपनी मध्यम आवाज़ का सर्वोत्तम योगदान दिया था? कमजोर अमिताभ बच्चन।लोग उनसे बहुत ज्यादा अपेक्षा रखते हैं।

मोदी सरकार की आम आदमी पार्टी के ऊपर की गयी कार्यवाही संघवाद की भावना के खिलाफ है

संघवाद की भावना में, मोदी की केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार से उन पदों के लिए वास्तविक रूप से अनुमोदन मांगने के लिए कह सकती थी। दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार के सामान्य प्रशासनिक...
बनवारीलाल पुरोहित

पावरफुल पुरुष हर समय महिला पत्रकारों का उत्पीड़न करते हैं, बच्चा समझते हैं व दूर कर देते हैं

क्या महिला पत्रकार एक प्रभाशाली वृद्ध व्यक्ति के प्रभाव को तोड़ने में समर्थ हो सकती हैं, सिर्फ इसलिए क्योंकि उन्होंने एक पत्रकार के गाल खींचे या थपकी दी या यूं ही पूछ लिया कि क्या आप शादीशुदा हैं?

अरेंज मैरिज बनी पुरानी तालीम,पाकिस्तान में अब ‘सीपीईसी विवाह’

बहुत अधिक इतराने वाले चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की वजह से पाकिस्तान में एक नई सांस्कृतिक लहर दौड़ रही है
नरेंद्र मोदी दिल्ली मेट्रो में

जाते जाते अब निकल ही गया: कैसे नरेंद्र मोदी के हाथों से फिसला सियासी अफसाना

सरकार के लिए यह कोई असाधारण बात नहीं है कि वह अपने अंतिम या अंतिम के दो सालों में अलोकप्रिय हो। असाधारण क्या है? हमने कभी नहीं सोचा था कि यह सब,मास्टर कम्युनिकेटर नरेन्द्र मोदी के साथ होगा।
प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी

मोदी समर्थकों का अस्तित्व संकट में क्योंकि मसीहा मोदी के गिरने वाले हैं वोट

मसीहा के रूप में मोदी के मंसूबे कामयाब रहे तथा वाजपेई के अधिकतम वोट की तुलना में उन्होंने 5-7 प्रतिशत अधिक वोट जीते। लेकिन वर्तमान स्थिति के हिसाब से संतुलन बिगड़ सकता है।

इंदिरा गांधी के बाद अब मोदी शासन में कमज़ोर दिखाई दे रही हैं भारतीय संस्थाएं

एक सुव्यवस्थित समाज जो आर्थिक रूप से बेहतर करने की उम्मीद करता है और इसके नागरिकों द्वारा वह अपने मूलभूत संस्थानों को मजबूत करता है।
Journalists

प्रेस की आज़ादी के लिए साथ लड़ो या मरो : भारतीय पत्रकारों के लिए मुश्किलों से भरा बैलेंस

मीडिया एक-दूसरे से असहमत हो सकती है, लड़-झगड़ सकती है और आलोचना कर सकती है। लेकिन यह तभी बची रह सकती है और पनप सकती है जब ये सब मतभेद भुलाकर एक होकर रहे, खासकर तब जब इसके प्रमुख सिद्धांतों पर हमले हो रहे हों|

अम्बेडकर की 10 धारणाएं जिनसे पता चलता है की भाजपा उनका सहयोजन नहीं कर सकती

अम्बेडकर के विचारों को मिटाने के लिए, उनकी प्रतिमा के आगे झुककर नमन करना पर्याप्त नहीं है। गहराइ के साथ वे भारत के दलितो के बीच में है।

मत-विमत

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सामाजिक न्याय की राजनीति के लिए कठिन, लेकिन संभावनापूर्ण समय है

मौजूदा लोकसभा चुनाव में उन राजनीतिक दलों को गहरा धक्का लगा है, जो खासकर उत्तर भारत में वंचित समूहों का नेतृत्व करने का दावा करते थे. आखिर क्यों फंस गई है सामाजिक न्याय की राजनीति?

राजनीति

देश

news on politics

अमेठी में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के करीबी सुरेंद्र सिंह की हत्या, सदिग्ध हिरासत में

लोकसभा चुनाव के दौरान जूता वितरण प्रकरण मे पूर्व प्रधान सुरेंद्र सिंह काफी चर्चा मे रहे. सुरेंद्र सिंह का प्रभाव कई गांवों में था.

लास्ट लाफ

लास्ट लाफ: मोदी लहर में उड़ गया विपक्ष, भाजपा 300 के पार

चयनित कार्टून पहले अन्य प्रकाशनों में प्रकाशित किए जा चुके हैं. जैसे- दिप्रिंट, ऑनलाइन या सोशल मीडिया पर और इन्हें उचित श्रेय भी मिला है.