हाल के कांग्रेस नेता राहुल गांधी के तीर उतने निशाने पर नहीं लगे जैसे ‘सूट-बूट वाली सरकार’ का तंज़ निशाने पर लगा था, उन्हें बेरोज़गारी का मुद्दा उठाना चाहिए.
समझाने-बुझाने और खौफ पैदा करने की रणनीति ही सबसे अच्छी और अनिवार्य है. लेकिन इसके लिए आपमें दंड देने की वह क्षमता होनी चाहिए जिससे पाकिस्तान डरे और कोई दुस्साहस करने से बाज आए
औपनिवेशिक खुफिया तंत्र क्रांतिकारियों को व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि खतरे के रूप में दर्ज करता था. ऐसा करके उसने कई ज़िंदगियों को इतिहास से निष्कासित कर दिया.