खासकर दलित और पिछड़ी जातियों के नेताओं को अक्सर जातिसूचक अपमानजनक संबोधन झेलने पड़ते हैं और जाति कर्म के आधार पर उनका मजाक उड़ाया जाता है. क्या है इसकी समाजशास्त्रीय व्याख्या?
पिछले पांच सालों के दौरान अगर ख़ूब 'विकास' हुआ है, तो चुनाव प्रचार के दौरान बीजेपी के नेता विकास पर वोट क्यों नहीं मांग रहे हैं? आखिर क्यों मुसलमान विरोधी धुव्रीकरण की कोशिश की जा रही है?
मुंबई में रिकॉर्डिंग स्टूडियो केवल प्रसिद्ध भोजपुरी गायकों की उम्मीदों को पूरा कर रहे हैं. वहां रिकॉर्डिंग और गुजर-बसर महंगा है, दिल्ली में, एक गीत 2,500 रुपये में तैयार हो जाता है और स्टूडियो हाथों-हाथ लेते हैं.
पिछले कुछ दिनों से लग रहे क़यासों को सही साबित हुए, डॉ उदित राज ने आख़िरकार बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस ज्वाइन कर लिया है. उन्होंने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली से अपना टिकट कटने की वजह से बीजेपी छोड़ दी है.
बिहार के चुनावी समर में बेगूसराय सिर्फ एक सीट है. लेकिन यहां कन्हैया के खड़े होने और उनके पक्ष में देशभर से प्रगतिशील लोगों के जमा होने से इसे बहुत ज़्यादा मीडिया कवरेज मिल रही है. वहां जावेद अख्तर के एक बयान से विवाद हो गया है.
दिल्ली सरकार में मंत्री रहे अरविंदर सिंह लवली को कांग्रेस ने ईस्ट दिल्ली सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. 1980 में चरणजीत सिंह बने थे दक्षिणी दिल्ली से सांसद.
अक्सर कांग्रेस का ‘मुस्लिम चेहरा’ बताए जाने वाले दिग्विजय सिंह अपनी छवि सुधारने और भोपाल के मुकाबले को ‘हिंदू धर्म बनाम हिंदुत्व’ का रूप देने के लिए प्रयासरत हैं.