प्रधानमंत्री जी, बताइए यह यदि वर्ण-व्यवस्था ही हिंदू राष्ट्र की परिकल्पना का मूलाधार है, तो फिर किसी पिछड़े (शूद्र) का अपमानित होना स्वाभाविक बात है. यह तो मनुस्मृति कहती है.
किसान और छोटे कारोबारियों में ज्यादातर पिछड़ी जातियों के हैं और उनको लुभाने के लिए मोदी ने पहले चरण के चुनाव के बाद जाति बताने की कवायद शुरू कर दी है कि वे भी पिछड़े वर्ग से हैं.
कांग्रेस की अगुआई वाला विपक्ष 2019 के चुनाव में एनएसएसओ की एक रिपोर्ट की सहायता से बेरोजगारी की समस्या को उजागर कर रहा है, जबकि पूरी दुनिया में रोजगार परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है.
ऐसा प्रतीत होता है कि भाजपा इस बारे में नहीं सोचती है कि साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने से दुनिया भर के नेताओं के बीच क्या संदेश जायेगा. हालंकि, मोदी अक्सर उन्हीं नेताओं के बीच आतंकवाद का मुद्दा उठाते हैं.
भारत में लोकतंत्र के टिके रहने की एक बड़ी वजह यह कि वंचित समुदायों को इस शासन प्रणाली से अब भी उम्मीद है. आज जब संविधान पर हमले हो रहे हैं, तब वंचितों की एकता के जरिए ही लोकतंत्र की रक्षा हो सकती है.
चुनाव आयोग ने बीएसपी अध्यक्ष मायावती के चुनाव प्रचार पर 48 घंटे की रोक लगाकर एक ऐसी चुनौती पेश कर दी, जिसका सामना करने के लिए बहनजी ने भतीजे आकाश आनंद को मैदान में उतार दिया.