वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा सरकारी गाड़ी के इस्तेमाल, जवानों से घरेलू नौकरों का काम लेने और बिजली बिलों में हेरफेर जैसे विशेषाधिकारों के दुरुपयोग के मामले बेकाबू हो चुके हैं.
झारखंड में इसी साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं. लोकसभा चुनाव में भारी जीत हासिल करके बीजेपी ने बढ़त ले ली है. वह अपनी सरकार बचाने के लिए लड़ेगी, लेकिन क्या विपक्षी दल इस लड़ाई के लिए तैयार हैं?
भारत का संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और उसमें दर्ज एससी-एसटी (अत्याचार निवारण) एक्ट दलित-आदिवासियों को ब्राह्मणवाद के सामंती मानस से संरक्षण प्रदान करता है.
कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र के माध्यम से सही चाल चली थी, लेकिन वह मसले चुनावी प्रचार में पीछे छूट गए. रोजगार की योजना, किसानों को राहत, ओबीसी के लिए कार्यक्रम आदि के बारे में कांग्रेस मतदाताओं को बता ही नहीं पाई.
विपक्ष को सीखना होगा कि मुद्दे को चिन्हित करके अपनी बात कहे, रचनात्मक और सकारात्मक ढंग से अपनी बात रखनी होगी और लोगों की आशा-आकांक्षा से जुड़ने वाली भाषा अख्तियार करनी होगी.
भारतीय समाज को निर्मम व निकृष्ट तरीके से विखंडित कर देने का इनाम बीजेपी को मिला है. वंचित तबकों के लिए इस जनादेश का क्या है मतलब और इसका कैसा होगा प्रतिकार.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?