पाकिस्तान के तानाशाह ज़ियाउल हक़ ने इसे शुरू किया था. इमरान ख़ान ने नवाज़ शरीफ़ को निशाना बनाकर चुनाव जीतने के लिए इसका इस्तेमाल किया. और अब प्रधानमंत्री ख़ान इसके सम्मोहन में बंधे हैं.
डॉक्टरों के साथ मारपीट न हो, इसके बंदोबस्त होने चाहिए. लेकिन क्या डॉक्टरों की हड़ताल मरीजों के जीने के अधिकार का उल्लंघन नहीं है? क्या है इस बारे में कानूनी स्थिति?
मद्रास हाईकोर्ट के एक जज ने मेरे छोटे बालों पर टिप्पणी की और मैंने आपत्ति की. पर अन्य पुरुष वकीलों ने मुझसे माफी मंगवाई. महिला वकीलों के सामने इस तरह की चुनौतियां हैं.
विशेषज्ञता को आउटसोर्स किया जा सकता है, पर नेतृत्व को नहीं. इसके लिए मोदी सरकार को सिविल सर्विस का रुख करना होगा, जिसे कि यूपीएससी परीक्षाओं से आगे देखने की ज़रूरत है.
यूपीए-2 को समर्थन देने के बावजूद कांग्रेस ने आरजेडी, सपा, बसपा, एलजेपी जैसे दलों को सरकार में शामिल होने का निमंत्रण नहीं दिया. बल्कि कांग्रेस इन दलों को कमजोर करने में जुटी रही.