नागरिकता कानून पर पूर्वोत्तर में जारी अशांति शायद ही धर्मनिरपेक्षता को लेकर है. लोग बस अपनी विशिष्ट जनजातीय संस्कृति को बाहर से आए बंगालियों से सुरक्षित रखना चाहते हैं.
वर्तमान हालात में इन सत्ताधीशों को एक चीज याद दिलाई जा सकती है, अदम गोंडवी के शब्दों में- 'हैं कहां हिटलर, हलाकू, जार और चंगेज खां, मिट गये सब कौम की औकात को मत छेड़िये.'
भाजपा सोचती है कि अगले आम चुनावों से पहले अर्थव्यवस्था में सुधार आने लगेगा. लेकिन इस तरह की सतही अटकलें तब तक पूरी नहीं हो सकतीं जब तक आज की दिशा को जल्दी उलटा नहीं जाता.
इंटरनेट और मोबाइल एसोसिएशन की रिपोर्ट ‘इंडिया इंटरनेट 2019’ के मुताबिक झारखंड में इंटरनेट का पेनेट्रेशन मात्र 26% है. झारखंड से नीचे सिर्फ बिहार है जहां 25% है. जबकि केरल और दिल्ली में क्रमशः 54% और 69% है.
भारत ने शीतयुद्ध के बाद के 25 वर्षों में अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक समीकरणों में खुद को पाकिस्तान से अलग कर लिया था मगर मोदी सरकार ने इस स्थिति को नाटकीय रूप से उलट दिया है.
हमारे संविधान में भारत के विचार का प्रतिबिंब है जिसके साथ मोदी सरकार धोखा कर रही है. जैसा कि मैंने अपने संसदीय भाषण में कहा था, नागरिकता संशोधन विधेयक का पारित होना महात्मा गांधी के विचार पर जिन्ना की सोच की जीत है.
एक विश्वविद्यालय किसी भी स्थायी उत्कृष्टता को प्राप्त नहीं कर सकता है जब तक कि उसके पास एक मजबूत स्नातक कार्यक्रम न हो. और इसके लिए अच्छे शिक्षकों की जरूरत है.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.