मुशर्रफ़ को मृत्युदंड सुनाए जाने से परेशान पाकिस्तानी सेना का कहना है कि वह कभी गद्दार नहीं हो सकते क्योंकि उन्होंने 40 वर्षों तक देश की सेवा की है और दो युद्धों में भाग लिया है.
एक राष्ट्र के तौर पर सबसे बड़ी चिंता होती है कि विश्व बंधुत्व कैसे कायम हो और किसी भी प्रकार के धार्मिक दंगे न हों. ये बड़ी चिंता है. भारत के लिए ये इसलिए जरूरी हो जाती है क्योंकि देश के निर्माण में हमनें जिन मूल्यों को रखा उसमें समानता, स्वतंत्रता, बंधुत्व, धर्मनिरपेक्षता जैसे मूलभूत और जरूरी तत्व शामिल थे.
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) ने और उससे पहले असम में हुए राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के पायलट प्रोजेक्ट ने जैसे दूध को फाड़ने वाला काम कर दिया है. इससे बांग्लादेश में कई तरह के सवाल खड़े होने लगे हैं.
अगर हम समझ रहे हैं कि जामिया के परिसर में पुलिस ने छात्रों पर जो बर्बरता की उसकी प्रतिक्रिया में ही देश के कोने-कोने से छात्र विरोध में उठ खड़े हुए तो फिर ऐसा सोचना हमारी भूल है.
गृह मंत्री का यह कहना कि नागरिकता का नया कानून जरूरी है क्योंकि कांग्रेस ने देश का धर्म के आधार पर बंटवारा किया, बताता है कि वे इतिहास के फिसड्डी छात्र रहे हैं.
नागरिकता संशोधन कानून का विरोध कर रहे संगठनों और राजनीतिक दलों के साथ ही छात्र संगठनों को भी यह ध्यान रखना होगा कि उनके आन्दोलन में कहीं अराजक तत्व अपनी पैठ बनाकर हिंसा और तोड़फोड़ या आगजनी नहीं कर रहे हैं.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.