सिटिजनशिप बिल के साथ गंगा एकदम से उल्टी बह निकली है और हम धर्मनिरपेक्ष राज्य से ‘धर्म-सापेक्ष’ राज्य के मुहाने पर आ गये हैं. वे सभी जो आइडिया ऑफ इंडिया में यकीन करते हैं अब उठ खड़े हों.
‘एक देश, एक विधान, एक निशान’ के नाम पर बहुलता को नष्ट करने को प्रतिबद्ध पार्टी कुछ क्षेत्रों में ‘अल्पसंख्यकों के केन्द्रीकरण’ से ‘खतरा’ महसूस कर उनकी आबादी का स्वरूप बदलने पर आमादा दिखती है.'
बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत आए बंगाली शरणार्थियों को नागरिकता देने के मामले को धर्म से जोड़कर बीजेपी ने मामले को पेचीदा और राजनीतिक बना दिया है.
अगली बार एनआरसी लागू – असम और पूरे भारत में करते समय मोदी सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि गैर-मुस्लिमों को बचाया जाए और अधिक से अधिक मुसलमानों को नागरिक रजिस्टर से बाहर रखा जाए.
एनकाउंटर या कस्टोडियल डेथ से देश में अराजकता आएगी, जिसका सबसे ज्यादा शिकार गरीब, कमजोर वर्ग और औरतें ही होंगी. कानून का राज मजबूत करने से ही रुकेंगे बलात्कार
बलात्कारियों को मृत्युदंड के खिलाफ राय रखने वालों की दलील है कि इस अपराध के अंतर्निहित कारण – स्त्री जाति से घृणा – को लक्षित किया जाना चाहिए. पर 130 करोड़ लोगों के देश में इसकी शुरुआत कहां से हो?
बजाज की टिप्पणियों से वास्तव में भाजपा को अपनी इस राजनीतिक छवि को मजबूत करने में मदद मिलती है कि वह उद्योगपतियों से करीबी रिश्ता नहीं रखती, और यह भाजपा को अपनी राजनीतिक पूंजी और अपना राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने में मदद ही कर सकता है
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.