सांसद गणेश सिंह पटेल शुरू से ही मंडल आयोग की सिफारिशों के प्रबल समर्थक रहे हैं. वे मूल रूप में समाजवादी विचारधारा के समर्थक हैं और मंडल कमीशन के समर्थन में हुए आंदोलन में भी उन्होंने हिस्सा लिया था.
कनाडा के प्रधानमंत्री ट्रूदू से लेकर अमेरिकी नेता बेतो ओ’रुर्क तक दुनियाभर में नेताओं का दाढ़ी रखना या न रखना उनके बारे में खास संदेश देता रहा है. भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सफ़ेद दाढ़ी या काँग्रेस नेता राहुल गांधी का सफाचट चेहरा भी कुछ-न-कुछ कहता है
सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण के खिलाफ अदालत की अवमानना के 11 साल पुराने मामले पर सुनवाई नए सिरे से करने का फैसला किया है. उम्मीद है,अदालत की निष्पक्ष सुनवाई से कुछ बहू प्रतीक्षित सवालों के जवाब मिलेंगे.
बाबरी मस्जिद का 1992 का विध्वंस अचानक घटी कोई घटना नहीं थी. मस्जिद को ढहाने में इस्तेमाल औजारों में हमारे परिवारों में होने वाली चर्चाओं का भी योगदान था.
प्रधानमंत्री मोदी चुनावी रैली को संबोधित करने फैजाबाद आये थे तो भी कुछ ही किमी दूर स्थित अयोध्या में विराजमान रामलला के दर्शन करने नहीं गये. लेकिन अब ‘विकास के महानायक’ का आसन डगमगाया और करिश्मा चुक गया है तो मंदिर के लिए भूमि पूजन करने आ रहे हैं.
मोदी सरकार की राष्ट्रीय शिक्षा नीति पहले 1966 में कोठारी आयोग ने भी मातृभाषाओं को शिक्षा का माध्यम बनाने की सिफ़ारिश की थी. लेकिन भारत ने न उसके बाद अंग्रेजी से मुंह मोड़ा और न अब आगे भी शायद मोड़ेगा.
अगर मोदी सरकार सैद्धांतिक पूर्वाग्रह के चलते देसी भाषा को बच्चों की पढ़ाई का मीडियम बनाने पर ज्यादा ज़ोर देने की कोशिश करेगी तो ‘एनईपी’ को इस दीवार से टकराना पड़ेगा.
मुझे लिखित संदेश मिला कि कानू सान्याल अपना ‘प्रतिनिधिमंडल’ मेरे पास भेजना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही थी कि अपने उग्र समर्थकों के साथ आ रहे दुबले-पतले गुस्सैल बूढ़े आदमी के साथ बेहद तीखी मुठभेड़ होगी.