ज़रूरी नहीं कि अतीत के नायकों की तमाम कांस्य प्रतिमाएं, अन्याय का ही प्रतीक हों. कभी-कभी गुलामों के भी स्मारक होते हैं. आंबेडकर मेमोरियल के मामले में, उन्हें और अधिक सराहना मिल सकती थी, अगर वो इतने ज़ाहिरी तौर पर जीवितों के साथ न जोड़े गए होते.
नस्ली और जातीय भेदभाव के बीच समानता को पहली बार उजागर करने का श्रेय ज्योतिराव फुले को जाता है. उन्होंने करीब 150 वर्ष पहले अमेरिका के कालों और भारत के दलितों की स्थिति की परस्पर तुलना की थी.
अमेरिका में पुलिस हिरासत में जार्ज फ्लॉयड की हत्या निश्चित ही निंदनीय है और इसकी दुनिया भर में भर्त्सना हो रही है लेकिन इस पर आक्रोश व्यक्त कर रही जनता द्वारा हिंसा, आगजनी और लूटपाट बेहद चिंताजनक है.
असली अर्थनीति ऐसे प्रश्नो पर फैसला करने में निहित है कि पैसा सीधे लोगों के खाते में डाला जाए या उसे आर्थिक वृद्धि के लिए निवेश किया जाए, और इस तरह के फैसले तुकबंदियां करके टाले नहीं जा सकते.
कोरोना महामारी पर सारी बहस वैचारिक खेमों के हिसाब से बंटी दिखाई देती है, भाजपा के बड़े नेता अपने संकीर्ण राजनीतिक हित साधने के लिए इस विभाजन का फायदा उठा रहे हैं, और कुल मिलाकर यही लग रहा है की हालात किसी के काबू में नहीं है.
दीन दयाल उपाध्याय की हत्या और माधवराव सिंधिया के प्लेन क्रैश से लेकर गांधी परिवार की हत्याओं तक, राजनीति में जो कुछ भी होता है, उसका हिसाब-किताब से कम और किस्मत से ज़्यादा लेना-देना होता है.