विश्व के सभी आला दर्जे के नेता इस सप्ताह न्यूयॉर्क में हैं और साथ ही पाकिस्तान की कश्मीर मामलों की समिति के अध्यक्ष शहरयार अफरीदी भी. लेकिन वे तो लीवायज़ की कमीज में घूम रहे हैं और अमेरिकी महिलाओं और बेघरों पर टिप्पणी कर रहे हैं.
प्रश्नम ने अपने सर्वे में पंजाब के मतदाताओं से पूछा कि आगामी विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद के लिए चरणजीत चन्नी, अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू में से कौन कांग्रेस का चेहरा होना चाहिए.
निरंतर उत्कर्ष की ओर बढ़ते केजरीवाल, ममता, और जगन मोहन सरीखे मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ कांग्रेस और भाजपा के कमजोर मुख्यमंत्री भी हैं जिन्हें आलाकमान जरूरत पड़ने पर हटा कर ज्यादा ‘फायदेमंद’ चेहरे को सामने ले आता है.
COAS और CDS दोनों हैसियत से जनरल बिपिन रावत की मीडिया में मौजूदगी ने, अपने पीछे बेतुकी बातों और विचारों का एक ऐसा सिलसिला छोड़ा है, जिसने अनावश्यक विवादों को जन्म दिया है.
अगर चन्नी वह सब करने में सफल रहे जो अमरिंदर पिछले चार सालों में नहीं कर पाए थे, तो गांधी परिवार के लिए उन्हें दरकिनार करना मुश्किल हो जाएगा. इससे सिद्धू के लिए राह कठिन ही होगी.
किसानों में छोटे और बड़े का विभाजन पैदा करके उन्हें जातीय अस्मिता की राजनीति में उलझाया जा रहा है. राजा महेन्द्र प्रताप सिंह के जाट होने की याद दिलाकर उनके नाम पर विवि के शिलान्यास के पीछे यही राजनीति है, जिसका उद्देश्य है पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कुल जनसंख्या के 17 प्रतिशत से ज्यादा जाट किसानों को पटाना.
जोखिम खत्म नहीं हुआ है. इसका रूप बदल गया है—यह नॉन-परफॉर्मिंग लोन की वजह से बैलेंस शीट पर दबाव से हटकर तेजी से बढ़ते डिजिटल सिस्टम को संभालने की ऑपरेशनल चुनौतियों में बदल गया है.