मोदी सरकार को 15 अगस्त 2022 के बाद अपना यह विचार बदलने के बारे में सोचना चाहिए ताकि व्यक्तियों द्वारा ’24 घंटे’ झंडा फहराए रखने की प्रथा को निरुत्साहित किया जा सके क्योंकि यह व्यावहारिक नहीं है.
नरेंद्र मोदी के 2014 के मंत्रिमंडल में शामिल 19 में से चार मंत्री ही उनके दूसरे मंत्रिमंडल में बचे रह गए हैं— नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, नरेंद्र तोमर, स्मृति ईरानी; और इन सबको लेकर भी अनिश्चितता पैदा हो गई है.
2019 में अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक नक्शा दिखाया जिसमें इराक और सीरिया में आईएसआईएस खिलाफत की तबाही दिखाई गई थी. एक छोटा सा निशान जो रह गया था, उसके लिए उन्होंने कसम खाई कि वो ‘आज रात तक चला जाएगा’.
महामारी के पहले साल में भारत का प्रदर्शन खराब रहा मगर वह इससे तेजी से उबरने वाले देशों में रहा लेकिन वैश्विक माहौल बहुत अनुकूल नहीं है इसलिए बहुत आशावादी होना भी ठीक नहीं.
पश्चिम बंगाल चुनाव में वामपंथी दल और कांग्रेस खुरचन में हिस्सेदारी के लिए होड़ लगा रहे हैं. पूर्वी-मध्य भारत में माओवाद को कब्र में दफन कर दिया गया है, तो केरल में वे सरकार विरोधी दोहरी भावना से जूझ रहे हैं.