जलवायु परिवर्तन के कारण पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को अभूतपूर्व बाढ़ के चलते नुकसान में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है, यह बताता है कि बदलाव क्यों जरूरी हो गया है.
भारतीय विदेश नीति के लिए कमज़ोर रूस के मिले-जुले मायने हैं: वो बीजिंग के प्रति अधिक आभारी हो सकता है, लेकिन इंडो-पैसिफिक में चीन को उसका समर्थन कोई ख़ास मायने नहीं रखेगा.
सुप्रीम कोर्ट ने 2019 के फैसले में कहा था कि देश में सभी उपासना स्थलों की रक्षा का कानूनी और संवैधानिक दायित्व सरकार का है, लेकिन मथूरा और वाराणसी की अदालतों ने अलग राह पकड़ी.
सुमदोरोंग चू में टक्कर के बाद पुरानी स्थिति की बहाली में नौ साल लगे थे, पीपी-15 से सेनाओं की वापसी में 13 महीने लगे यानी चीन के साथ सीमा संबंधी वार्ता एक लंबी और दुष्कर प्रक्रिया होती है.
किसी ने यह नहीं सोचा होगा कि भाजपा सरकार चुनाव सुधार करने के अपने वादे पूरे करेगी लेकिन असली निराशा सुप्रीम कोर्ट से हुई है जिसने मामले को बहुत गरम मान कर इसे अगली-ज्यादा-बुद्धिमान-पीढ़ी के सुपुर्द करने जैसा फैसला किया
अगर हमें बहुसंख्यकवाद का विरोध करना है, तो हमें द्रविड़ राजनीति के तीन वैचारिक स्तंभों- क्षेत्रवाद, तर्कवाद और सामाजिक न्याय को नए तरीकों से अपनाना होगा.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.