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Tuesday, 31 March, 2026
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1971 की जंग और क्यों बांग्लादेश और भारत के हित धर्मनिरपेक्षता में निहित हैं

मुजीबुर रहमान ने कहा था कि हमारी धर्मनिरपेक्षता धर्म के खिलाफ नहीं है. मुसलमान अपने धर्म का पालन कर सकते हैं. हिंदू भी अपने धर्म का. बौद्ध अपने धर्म का पालन करें. ईसाई अपने धर्म का. हमारी एकमात्र आपत्ति धर्म को राजनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करने को लेकर है.

क्यों समरकंद के लिए उड़ान भर रहे मोदी, LAC मुद्दे पर धीरे-धीरे लाइन पर आ रहे हैं शी जिनपिंग

एलएसी पर बने गतिरोध के दूसरे वर्ष भी जारी रहने के साथ ही मोदी का शिखर सम्मेलन से फिर से अनुपस्थित रहना शी जिनपिंग के चेहरे पर एक कूटनीतिक तमाचे जैसा होता.

हैदराबाद ‘मुक्ति’ दिवस मनाने का मोदी सरकार का फैसला पुराने जख्म ही कुरेदेगा

क्योंकि इसके पीछे मंशा तेलंगाना के 15 फीसदी मुसलमानों को उकसाने की दिखती है, इससे बेहतर तो है ‘एकीकरण’ दिवस मनाने का केसीआर का फैसला.

अशराफ कहते हैं कि इस्लाम में जातियां नहीं, फिर कुफू, खुतबा और फ़िरक़ा पर उनके विचार क्या कहते हैं?

इस्लाम दो तरह का है एक अशराफ का इस्लाम और दूसरा पसमांदा का इस्लाम. पसमांदा ऊंच नीच रहित मुहम्मद (स०) के सैद्धान्तिक इस्लाम की वकालत करता है वहीं अशराफ अपने द्वारा व्याखित इस्लाम को ही इस्लाम मानता है.

‘हीरे तो सस्ती चीज हैं’, इमरान खान तो सबसे ताकतवर संस्था का वर्चस्व तोड़ने का इरादा रखते हैं

पांच कैरेट के हीरे का मनहूस साया सिर्फ इमरान और बुशरा पर ही नहीं पड़ा है, बल्कि यह सर्वशक्तिमान जनरलों के प्रभुत्व पर भी ग्रहण बनकर मंडराने लगा है.

मोदी सरकार को क्यों भौतिक के मुकाबले सामाजिक इन्फ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को तरजीह देनी चाहिए

भारत को भौतिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में जितने सुधार की जरूरत है उससे कम सुधार की जरूरत सामाजिक इन्फ्रास्ट्रक्चर में नहीं है. लोगों को सक्षम बनाने की जरूरत को उसके पूरे अर्थ में समझना और पूरा करना बहुत जरूरी है.

नीतीश कुमार तय करें कि राष्ट्रीय राजनीति में वो जॉर्ज फर्नांडीज बनना चाहते हैं या वीपी सिंह

विपक्षी एकता के लिए चंद्रशेखर राव की कोशिशें चर्चा में थीं और अब, जब वे पटना जाकर बिहार के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव से मिल आये हैं, तो नीतीश की कोशिशों से माहौल गरमाया हुआ है.

नेपाली गोरखा सैनिक बेहतर अग्निपथ योजना के हकदार हैं

भारत ने सेना में नेपाली गोरखा सैनिकों को भी अग्निपथ योजना के तहत लाने के बारे में नेपाल से परामर्श नहीं किया जबकि वे 200 साल से भारतीय सेना को अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

कर्तव्य पथ पर मोदी से मत पूछिए वे आपके लिए क्या करेंगे, खुद से पूछिए कि आप उनके भारत के लिए क्या करेंगे

नागरिकों के कर्तव्य पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज़ोर देने का राजनीतिक अर्थ यह है कि गेंद जनता के पाले में डाल दिया जाए. और यही वे सत्ता में आने के बाद से करते रहे हैं.

भव्यता की हदें छूती देखने लायक फिल्म ‘ब्रह्मास्त्र पार्ट वन-शिवा’

एक अच्छा टाइम पास मनोरंजन देने वाली इस फिल्म को इसकी भरपूर भव्यता के लिए देखा जाना चाहिए-परिवार के साथ, दोस्तों के साथ, बच्चों के साथ. लेकिन कहानी और पटकथा की बारीकियों पर गौर न करें, आपको निराशा ही हाथ लगेगी.

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दिल्ली में बना अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन, जिसकी कोई गारंटी नहीं: उदयनिधि

तिरुवन्नमलई, 30 मार्च (भाषा) तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने सोमवार को ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (अन्नाद्रमुक)- भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.