2004 में सत्ता में वापसी के रूप में काँग्रेस की जो लॉटरी लगी थी उसके कारणों पर यथार्थपरक आत्ममंथन करने की जगह उसने उससे तमाम तरह के गलत राजनीतिक निष्कर्ष निकाल लिये.
पूंजीवाद ठीक से काम करता रहे, बाजार बड़ा हो, उद्यमों को अच्छा वर्कर मिले, इसलिए भी जरूरी है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों का जीवन स्तर बेहतर हो और आगे बढ़ने और गरिमा से जीने का मौका हर किसी के लिए खुला हो. यही द्रविड़ियन मॉडल है.
हमारी धारणाओं के विपरीत, कंबोडिया को शैव बनाया हिंदू संतों द्वारा करवाए गए धर्मांतरण, बाजार की ताक़तों के उभार और ‘भारतीय’ विचारों के साथ कंबोडियाइयों के संवाद में विवेक के प्रयोग ने.
बप्पी लाहिड़ी की तरह सोने-चांदी के गहनों से सजे और गर्मजोशी से भरे, अपने चुटीले वाक्यों के लिए मशहूर ताहिर शाह की तरह भव्य चाहत अली खान दिग्गजों की पांत में शामिल हो गए हैं .
भाजपा और उसके विरोधी दलों के बीच चूहे-बिल्ली के खेल ने दोनों ही पक्षों को हास्यापद स्थिति में ला दिया है. इन सबके बीच मुस्कराने का मौका तो सिर्फ टीवी न्यूज को ही मिल रहा है.
जो भी सच में सच्चाई जानना चाहता है, वह आसानी से उन कई घटनाओं को देख सकता है—कश्मीर से लेकर लखनऊ तक, जहां भारतीय मुसलमान आतंकवादी हमलों के खिलाफ सबसे आगे खड़े होकर आवाज़ उठाते रहे हैं.