विहिप और बजरंग दल पहले भी गरबा पंडालों में मुस्लिमों के प्रवेश के खिलाफ फरमान जारी करते रहे हैं. लेकिन इस वर्ष इस सबमें पुलिस और राजनीति के शामिल हो जाने से पहले तक जमीनी स्तर पर चीजें ज्यादा नहीं बदली थीं.
खुशहाल भारतीयों ने तमाम क्षेत्रों में विजय की घोषणा कर दी है— हवाईअड्डों की बेहतरी से लेकर वैक्सीन लगवाने वालों की संख्या तक की मिसाल दी जाती है लेकिन बहुत कुछ ऐसा भी है जो गलत और खतरनाक है.
सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च की एक रिपोर्ट मोटी तस्वीर पेश करती है कि 1952 में पहले लोकसभा चुनाव से देश की राजनीति, अर्थव्यवस्था और समाज के ढांचे में किस कदर गहरा बदलाव आ गया है.
राजनीति भी फुटबॉल के खेल की तरह है: गेंद पर पकड़ मायने रखती है. गेंद पर पकड़ इतनी मजबूत है इस बार कि राजस्थान में चला सियासी संकट भी भारत जोड़ो यात्रा की सकारात्मकता को नहीं तोड़ पाया.
भारत जोड़ो यात्रा ने लोगों को असली राहुल गांधी को देखने-समझने का मौका दिया है, न कि राहुल की उस छवि को जिसका मखौल भाजपा उड़ाती है और जो टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर पेश की जाती रही है.
हतोत्साहित करने का चीनी भाषा में शब्द है— ‘वेई शे’. इसमें हतोत्साहित करने और कार्रवाई के लिए मजबूर करने की रणनीतियां समाहित हैं और उनमें कोई भेद नहीं किया जाता.
विकेंद्रण के तमाम दावों के बावजूद हमारी व्यवस्था अभी भी शहर केंद्रित है जिसमें गांवों में रहने वाले आम व्यक्ति की चिंता कम से कम यातायात के साधनों की उपलब्धता में नहीं दिखाई देती है.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.