भारत के सैन्य नेतृत्व को सैन्य संस्थान के राष्ट्रीय मूल्यों की रक्षा करने, उन्हें मजबूत बनाने और घरेलू राजनीति की खतरनाक प्रवृत्तियों से बचाने के लिए खुद संवेदनशील बनना चाहिए और सैनिकों को भी संवेदनशील बनाना चाहिए.
भाजपा के महासचिव (संगठन) के रूप में, बीएल संतोष के पास अपार शक्तियां हैं. लेकिन उनके पूर्ववर्तियों में से कोई भी उनके जैसा हाई-प्रोफाइल नहीं था, यहां तक कि नरेंद्र मोदी भी नहीं.
दक्षिण अफ्रीका में ‘काफिर’ शब्द, जिसे पहले बड़े अपमानजनक रूप से अश्वेतों के लिए प्रयुक्त किया जाता था, को अब गैरकानूनी घोषित कर दिया गया है. अब समय आ गया है कि भारत में भी ‘काफिर' शब्द पर बंदिश लगाई जाए.
समस्या दरअसल, सत्ताधीशों के उस ‘विवेक’ से है, जो यह समझना ही नहीं चाहते कि फिलहाल एक चौराहे के बहाने लता को स्वरकोकिला से ज्यादा रामभक्त बनाकर एक बड़े समुदाय के सामने पेश किया.
अमेरिका के यहूदी लेखक लुई फिशर ने यदि बापू की जीवनी न लिखी होती तो संभव है कि दुनिया की बापू के बारे में अधिक से अधिक जानने की प्रबल इच्छा ही नहीं होती.
गांधी ने देश को शांतिपूर्ण आंदोलन की ऐसी विरासत दी है जिसके नैतिक बल के आगे बंदूकें तक कमजोर साबित हो जाती हैं. महात्मा गांधी मजबूरी का नहीं बल्कि मजबूती का नाम थे.
दुनिया के वित्तीय, रणनीतिक, आर्थिक केंद्र बने अमेरिका, चीन, यूरोप आज चुनौतियों से रू-ब-रू हैं, ऐसे में उन सुर्खियों से आगे देखने की जरूरत है, जो संरचनात्मक दरारों और अराजकता पर ज़ोर दे रही हैं.
बेहद ध्रुवीकृत समय में, हाशिये पर धकेले गए अल्पसंख्यक पीछे मुड़कर अपनी उन जड़ों और बुनियादों को बचाने में जुट जाते जो उन्हें बहुत प्रिय होते हैं लेकिन राजनीतिक दृष्टि से यह एक खतरनाक जाल बुन सकता है.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.