दूसरे विश्वयुद्ध के बाद का इतिहास और इजरायल के अनुभव यही सिखाते हैं कि आपकी सेना चाहे कितनी भी ताकतवर हो, राजनीतिक और रणनीतिक मकसद हासिल करने में वह शायद ही मददगार होती है.
यह मानने का कोई कारण नहीं है कि गाजा में किसी दूसरे प्रकार का युद्ध अधिक मानवीय हो सकता था. यह विचार कि युद्ध को कानून द्वारा सभ्य बनाया जा सकता है, ने हमारी कल्पना को शांत कर दिया है.
डीडीसीए में सुधार के लिए बिशन सिंह बेदी की लड़ाई को प्रशासकों के खिलाफ किया गया हमला व्यक्तिगत माना गया, जो एक गलत समझ का परिचायक है. हालांकि उनका हर काम दिल्ली क्रिकेट की बेहतरी जैसे एक बड़े उद्देश्य से प्रेरित था.
दो समाधान दिमाग में आते हैं: सरकार को अधिकारियों के लिए कार्यकाल और अवधि तय करनी चाहिए और उच्च पदों के लिए पैनल को गैर-विवेकाधीन, मैट्रिक्स-आधारित और पारदर्शी बनाना चाहिए.
नवाज़ शरीफ पर सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की पैनी नज़र रहेगी, जो सभी दलों से बातचीत कर रहे हैं और अगर शरीफ की बात नहीं बनी तो किसी और को सत्ता में लाने का विकल्प उनके पास रह सकता है.
गुजरात में जो हो रहा है वह, उत्तर प्रदेश या मध्य प्रदेश में जो हो रहा है उससे ज्यादा बुरा नहीं है. जो अब पूरे देश में देखने को मिल रहा है उसके लिए अकेले गुजरात को दोष क्यों दिया जाए?