चुनाव आयोग ने कांग्रेस को उसके '40% कमीशन सरकार' अभियान के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसने कथित तौर पर 10 मई को कर्नाटक विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा को टार्गेट किया था.
PM मोदी ने राज्य में करीब डेढ़ दर्जन चुनावी जनसभाओं और आधा दर्जन से अधिक रोड शो के जरिए जनता का विश्वास हासिल करने का प्रयास किया, तो वहीं कांग्रेस ने 2024 के लोकसभा चुनावों में खुद को मुख्य विपक्षी दल के रूप में स्थापित करने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है.
बजरंग दल, जिसे कांग्रेस ने सत्ता में आने पर 'प्रतिबंधित' करने का वादा किया था, तटीय कर्नाटक में मौजूद है. बेंगलुरु में यह मुद्दा 'गेम-चेंजर' नहीं हो सकता है, लेकिन एंटी-इनकंबेंसी को बेअसर कर सकता है.
हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में कांग्रेस ने अनुसूचित जाति के 'स्पृश्यों' को अधिक टिकट दिए हैं और अनुसूचित जाति-वाम को नहीं दिए हैं. पार्टी को उम्मीद है कि इससे उसे एससी-लेफ्ट वोटों की भरपाई करने में मदद मिलेगी.
2018 में तटीय कर्नाटक की 19 में से 16 सीटें जीतने वाली बीजेपी ने अपने कई मौजूदा विधायकों का टिकट काट दिया है. इस तटीय और मलनाड जिलों में बीजेपी हिंदुत्व और मोदी ब्रांड के भरोसे ताल ठोक रही है.
यूपी में शहरी स्थानीय निकाय चुनाव योगी आदित्यनाथ और उनके शासन के बारे में हैं. गैंगस्टर मुठभेड़ों पर उनका माफिया-को-मिट्टी-में-मिला-देंगे वाला वाला बयान आकर्षण का केंद्र बना हुआ है.
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव प्रचार 8 मई को शाम 5 बजे थम गया. चुनाव के लिए वोटिंग 10 मई को होगी, जबकि चुनाव परिणाम 13 मई को आएंगे. इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने है जबकि जेडीएस मुकाबले को त्रिशंकु बना रही है.
सत्ता से बेदखल होने के कारण कांग्रेस नेताओं की खीज समझ में आती है लेकिन जिस तरह से वह मोदी विरोध के मुद्दे हर बार पहला मुद्दा बना देती है उससे सत्ताधारी दल की कमजोरियों को उजागर करने वाले बाकी अहम मुद्दे गौण हो जाते हैं.
बेलगावी कित्तूर-कर्नाटक का संभागीय मुख्यालय है, जहां लिंगायत समुदाय संभवतः सबसे प्रभावशाली हैं. समुदाय के लोगों का कहना है कि मतदान से पहले उनके पास विचार-विमर्श करने के लिए बहुत कुछ है.
HAL इंजीनियरों को विदेशों में और IITs तथा IIMs जैसे प्रमुख संस्थानों में प्रशिक्षण देने पर भारी निवेश करता है, लेकिन उनका पूरा और सही उपयोग नहीं हो पाता.