सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे का कहना है कि मुद्रीकरण की योजना बजटीय बाधाओं को दूर करने का सबसे अच्छा तरीका है, और इस क्षेत्र में तेजी आने के बाद इसे फिर शुरू किया जाएगा.
चीन के इस कदम को डी-एस्केलेशन के रूप में नहीं देखा जा सकता है. क्योंकि गतिरोध के दौरान भारत ने भी एलएसी पर सैनिक भेजे थे जिसे पहले ही वापस बुला लिया गया है.
हिरासत में लिए गए चीनी सैनिक के साथ बॉर्डर मैनेजमेंट संबंधी प्रक्रियाओं के मुताबिक कार्रवाई की जा रही है और इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर किन परिस्थितियों में वह भारतीय सीमा में घुसा था.
फ्रांसीसी फर्म दसॉल्ट ने ऑर्डर की संख्या के आधार पर भारत में राफेल विमान के निर्माण पर अपनी नजरें टिका रखी हैं. लेकिन भारत इस पर कोई भी फैसला पहले 36 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति होने के बाद ही करेगा.
नौसेना पहले ही स्मैश 2000 प्लस सिस्टम्स के ऑर्डर दे चुकी है, जो असॉल्ट रायफल्स को स्मार्ट हथियारों में बदल देते हैं जिससे वो फर्स्ट-शॉट हिट्स और एंटी-ड्रोन ऑपरेशन में सक्षम हो जाते हैं.
भारत ने अघोषित संख्या में स्पाइस बम-गाइडेंस उपकरणों और करीब 300 से 320 के बीच लंबी दूरी की एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल स्पाइक की आपूर्ति के लिए इजरायल के साथ 20 करोड़ डॉलर का करार किया है.
चीन अपना राजनीतिक उद्देश्य हासिल करने के लिए सैनिकों को पीछे हटाने पर समझौता करना चाहेगा. भारत को सैनिकों को पीछे हटाने या तनाव घटाने की पहल पर सहमत होने की जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए.
राजनीतिक नेतृत्व ने 1971 की तरह 2020 में भी सैन्य मामलों में दखल न देकर सही राजनीतिक निर्देश जारी किया, और रक्षा मंत्री ने सेना अध्यक्ष को सलाह दी कि 'जो उचित समझो वो करो.'