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Saturday, 21 March, 2026
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समाज-संस्कृति

स्वैग से लबरेज़ विनोद खन्ना ने विलेन, हीरो, सहायक अभिनेता और राजनेता के तौर पर छाप छोड़ी

काफी दिनों तक फिल्म इंडस्ट्री से दूर होने के बाद भी विनोद खन्ना की अदाकारी पर कोई फर्क नहीं पड़ा था. 5 सालों के बाद हुई वापसी के बाद उन्होंने दो हिट फिल्में दी थी.

एनडीएमसी के ‘सक्षम इको मार्ट’ में है प्लास्टिक का विकल्प, स्पेशल बच्चों की ‘कारीगरी’

पर्यावरण संरक्षण, आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तीकरण और स्वदेशी जैसे बापू के आदर्शों को हकीकत में लागू करने के लिए एनडीएमसी ने तीन 'सक्षम ईको मार्ट' खोले हैं.

अमित शाह के सामाजिक समीकरण के दम पर भारत कैसे हुआ मोदीमय

उत्तर प्रदेश में अमित शाह ने जिस तरह से सामाजिक समीकरण का जाल बिछाया था, वह बाद में अन्य चुनावों के लिए मॉडल बन गया.

फोटोग्राफर बनने के लिए झाबुआ के आदिवासी बच्चों ने थामा कैमरा  

आदिवासी बच्चों को यूनिसेफ और वसुधा विकास संस्थान ने फोटोग्राफी का प्रशिक्षण दिया है. आने वाले दिनों में उनकी तस्वीरें अगर विभिन्न प्रदर्शनियों में भी नजर आएं तो अचरज नहीं होगा.

अब ‘रावण’ से पेट नहीं पलता साहब, रामलीला कर देती है पुतला बनाने को मजबूर

तितारपुर की गलियों में रावण बनाने की शुरुआत 'रावण वाले बाबा' ने की. 'रावण वाले बाबा' के किस्से पुतला बनाने वालों में काफ़ी लोकप्रिय.

महात्मा गांधी ने भागलपुर में 5-5 रुपए में ऑटोग्राफ देकर बाढ़ पीड़ितों के लिए पैसा जुटाया था

महात्मा गांधी को 'महात्मा' बनाने वाला बिहार का चंपारण ही केवल बापू का कर्मक्षेत्र नहीं था. गांधी बिहार के भागलपुर भी आए थे और लोगों को स्वतंत्रता संग्राम के लिए एकजुट किया था.

मजरूह सुल्तानपुरी, ज़ख्मी दिलों पर गीतों का मरहम लगाने वाला शायर

मजरूह साहब की लेखनी में इंसानी एहसासात, गांव का भरा पूरा परिवेश, लादरीयत (आलस) भरी शाम, बंसी की मधुर धुन है और साथ ही जीवन का राग.

सौ साल पहले महात्मा गांधी ने बिहार में खोला था स्कूल, आज तक नहीं मिली मान्यता

गांधी चंपारण पहुंचने के बाद सबसे पिछड़े गांव भितिहरवा गए थे और वहां उन्होंने सबसे अधिक जोर शिक्षा, स्वच्छता व स्वास्थ्य पर दिया था.

शोले में ‘कितने आदमी थे’ का जवाब देने वाले ‘कालिया’ वीजू खोटे नहीं रहे

विजू खोटे साल 1964 से फिल्मी दुनिया से जुड़े थे. 50 साल से अधिक के अपने करियर में उन्होंने कई मराठी, हिंदी फिल्मों के साथ साथ टेलीविजन धारावाहिकों में और थियेटर में भी काम किया.

श्रद्धाराम फिल्लौरी: जिन्होंने ‘ऊं जय जगदीश हरे’ ही नहीं और भी बहुत कुछ रचा

श्रद्धाराम फिल्लौरी ने कवि कर्म से इतर भी हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है और कई विद्वान उनके उपन्यास ‘भाग्यवती’ को हिंदी का पहला उपन्यास मानते हैं.

मत-विमत

ईरान युद्ध भारत के लिए दिशा सुधारने का संकेत है, नौसेना को आगे आना चाहिए

भारतीय नौसेना हमेशा से भारत की राजनीतिक सीमाओं से परे, राष्ट्रीय कूटनीतिक और अन्य संपर्क प्रयासों को समर्थन देने में सबसे आगे रही है. अब आगे बढ़कर ज़िम्मेदारी उठाने का समय आ गया है.

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राजनीति

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दिल्ली, लद्दाख, अंडमान के उपराज्यपालों ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की

(तस्वीरों के साथ) नयी दिल्ली, 20 मार्च (भाषा) दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, उनके लद्दाख के समकक्ष विनय कुमार सक्सेना और अंडमान-निकोबार...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.