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Wednesday, 22 April, 2026
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ओपिनियन: ‘सेना को बलात्कारी कहने वाले कन्हैया से अब सवाल पूछे देशप्रेमी बेगूसराय’

कन्हैया कुमार उन लोगों में से हैं, जिन्हें विशुद्ध रूप से सोशल मीडिया ने क्रिएट किया है. उन्होंने कभी जनता के बीच कभी कोई काम नहीं किया है.

रविशंकर प्रसाद और मनीष तिवारी: नाक फुलाकर हर बात सही साबित करने की कला

मोदी सरकार केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रह चुके हैं.मनीष तिवारी 2012-13 में केंद्रीय मंत्री थे.

मोदी, शराब और जाति: क्यों भाजपा की अगुआई वाले एनडीए को बिहार में स्पष्ट बढ़त प्राप्त है

बिहार के राजनीतिक महत्व से कौन नहीं अवगत होगा. ये उन तीन राज्यों (बाकी दो पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश हैं) में से है जहां चुनाव के सातों चरणों में वोटिंग होगी.

आतंकवाद के खिलाफ कठोर कानून बनाने वाली कांग्रेस, क्या अब ‘नरम’ पड़ गई है

हमें एक बात समझ लेनी चाहिए कि आतंकवाद रोकथाम के मुद्दे पर कांग्रेस कोई नई-नवेली नहीं है. राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर वो भाजपा से ज्यादा गंभीर है.

नफरत के रास्ते पर चलकर तो भारत पाकिस्तान बन जाएगा

भारतीय भाषाओं के दो सौ से भी अधिक नामचीन लेखकों ने एक बयान जारी करके इस बात पर चिंता जताई है कि नफ़रत की...

दलितों की सामूहिक हत्याएं और हिंसा ‘हिंदू आतंकवाद’ है या नहीं?

अगर कोई ताकतवर समूह सुनियोजित और योजनाबद्ध हमला कर किसी खास वंचित सामाजिक समूह के दर्जनों लोगों को मार डालता है, तो क्या उसे आतंकी घटना नहीं कहा जाना चाहिए?

2013 में जिस बात से चली मोदी की आंधी, उसे अपना रहे अब राहुल गांधी

भाजपा के वक्ता झोंपड़ी में खाना खाने, हंसिया लेकर खेत में जाने जैसे प्रतीकात्मक काम कर रहे हैं जिनके लिए कभी राहुल गांधी का मजाक बनता था.

कई बार सहलाते नहीं बनती एक वोट की चोट

1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार अपने विश्वास प्रस्ताव पर लोकसभा में हुई वोटिंग में महज एक वोट से हारकर सत्ता से बाहर हो गई थी.

कांग्रेस सड़क के बीच खड़ी हो गई है, जहां दुर्घटना का सबसे ज़्यादा खतरा है!

कांग्रेस को ये समझने की जरूरत है कि एक साथ एससी, एसटी और ओबीसी की विशाल आबादी के साथ वह कट्टर सवर्ण आबादी को नहीं साध सकती. बीच में फंसने का भारी खतरा है.

जब तक बराबरी की चाहत है, तब तक याद किए जाएंगे मार्टिन लूथर किंग

किंग ने ऐसी दुनिया का सपना देखा था जहां रंग या नस्ल या किसी भी और आधार पर इंसानों के बीच भेदभाव न हो. वह सपना आज भी तमाम आंदोलनों की प्रेरणा है.

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अमेरिका अब तक ईरान को क्यों नहीं हरा पाया? क्योंकि ट्रंप कम खर्च में जीत हासिल करना चाहते हैं

ट्रंप का ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने का लक्ष्य, ईरान में इस्लामी शासन को गिराए बिना पूरा नहीं किया जा सकता, और यह काम ज़मीनी सैन्य आक्रमण (ग्राउंड इनवेज़न) के बिना संभव नहीं लगता.

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अलीगढ़ में निर्माणाधीन घर में मिला कारोबारी का शव, दो लोग हिरासत में लिये गये

अलीगढ़ (उप्र), 21 अप्रैल (भाषा) अलीगढ़ जिले के क्वार्सी क्षेत्र में मंगलवार शाम को एक गांव में एक निर्माणाधीन घर से एक स्थानीय...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.