scorecardresearch
Monday, 27 April, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

तेजी से आगे निकलने की हड़बड़ी, मोदी पहले कदम बढ़ाते हैं और सोचते बाद में हैं

मोदी सरकार की नीति निर्माण प्रक्रिया में कारक साक्ष्यों और प्लानिंग की जगह नहीं है.

धरने दे-दे कर गद्दी हासिल करने वाली इमरान की पार्टी आज़ादी मार्च रोकने की मज़ाकिया कोशिश कर रही है

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी के लोगों की मानें तो मौलाना फ़जलुर रहमान का विरोध प्रदर्शन जम्हूरियत के खिलाफ एक जंग है

क्या महाराष्ट्र में भाजपा के लिए शरद पवार की तोड़ हैं देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में नई बयार बह रही है पुराने जातीय और राजनीतिक समीकरण उलट-पुलट गए हैं. महाराष्ट्र कांग्रेस का गढ़ रहा है जहां आज भी गांधी टोपी पहने लोग दिखाई दे जाते हैं.

एनआरसी मामले में क्या करेगा फॉरेनर्स ट्रिब्यूनल, खुद बना हुआ है सरकार की कठपुतली

फॉरेनर एक्ट, 1946 की धारा 3 में स्पष्ट प्रावधान है कि केंद्र सरकार आदेश द्वारा विदेशियों के भारत में प्रवेश को निषिद्ध या विनियमित या प्रतिबंधित कर सकती है.

आइए ग्रेटा थनबर्ग पर निहाल हों ताकि सानंद को भूला जा सके, सत्ता भी यही चाहती है, सब यही चाहते हैं

ग्रेटा का गुणगान चौतरफा है और होना भी चाहिए, आखिर उन्होंने दुनिया के लाखों स्कूली बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बना दिया.

एससी-एसटी-ओबीसी उम्मीदवारों का कट ऑफ सामान्य वर्ग से ज़्यादा क्यों है

सुप्रीम कोर्ट के कुछ निर्णयों की वजह से भ्रम फैला है, इसलिए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के ज़्यादा नम्बर मिलने के बाद भी अनारक्षित वर्ग में शामिल नहीं किया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट के जज मामलों से अलग होने या नहीं होने को लेकर अपनी सुविधानुसार नैतिक मानदंड तय करते हैं

मुख्य न्यायाधीश गोगोई समेत सुप्रीम कोर्ट के कई जजों ने एक्टिविस्ट गौतम नवलखा की जमानत याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है. पर जब सचमुच में उन्हें किसी मामले से हटना चाहिए होता है, तब वे इनकार कर देते हैं.

बांग्लादेश की तरक्की, अमित शाह के अवैध प्रवासियों के ‘दीमक’ वाले बयान का मुंहतोड़ जवाब है

बांग्लादेशी घुसपैठ को बीजेपी अध्यक्ष देश की प्रमुख समस्या मानते हैं. लेकिन बांग्लादेश ने अगर इसी तरह भारत से दोगुनी रफ्तार से तरक्की करना जारी रखा, तो घुसपैठ अपने आप बंद हो जाएगी.

अब्दुल्ला और महबूबा कभी ‘भारत समर्थक मुख्यधारा’ में नहीं रहे, लेकिन खुलेआम विरोध भी नहीं किया

यदि संविधान की नाममात्र की शपथ लेना भारत समर्थक होने का प्रतीक है, तो फिर तो विधायक बनने पर हुर्रियत नेता सैयद अली शाह गिलानी ने भी ऐसी शपथ ली थी.

आरे मामला: अदालत का हस्तक्षेप देखने में अच्छा है मगर नीयत का सच्चा नहीं

संविधान के सहारे चलने वाले लोकतंत्र में अदालत का काम लोगों को सरकार की ज्यादती, बहुसंख्यकवाद की जकड़ और जनमत के दबाव से बचाना होता है.

मत-विमत

ईरान युद्ध ने भारत के लिए अगले युद्ध का खाका पेश कर दिया है

पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.

वीडियो

राजनीति

देश

भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से किसानों, युवाओं और एमएसएमई को होगा बड़ा लाभ: मोदी

नयी दिल्ली, 27 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार को भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को दोनों देशों की साझेदारी में एक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.