चालीस वर्षीय ऋषि शुक्ला 2022 में गुरुग्राम के सेक्टर 95 स्थित ROF आनंदा सोसाइटी में अपने नए घर में रहने आए. उन्हें उम्मीद थी कि घर खरीदने के बाद आम तौर पर जैसा होता है, वैसा ही होगा—घर में शिफ्ट होना, धीरे-धीरे रहन-सहन की व्यवस्था करना और सोसाइटी के अन्य निवासियों के साथ जुड़ना.
घर में आने से पहले ऋषि ने रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की सदस्यता के लिए बिल्डर को 1,188 रुपये की फीस दी. उस समय सोसाइटी का प्रबंधन बिल्डर ही संभाल रहा था. मेंटेनेंस चार्ज भी वही वसूल रहा था, क्योंकि घर के मालिकों का प्रतिनिधित्व करने वाली कोई सक्रिय संस्था उस समय मौजूद नहीं थी.
ऋषि को उम्मीद थी कि जैसे ही बिल्डर सोसाइटी का प्रबंधन निवासियों को सौंपेगा, RWA का गठन होगा. इसके बाद घर के मालिक धीरे-धीरे इसके सदस्य बनेंगे और सोसाइटी के प्रबंधन से जुड़े फैसलों में उनकी भी राय होगी.
ऋषि ने कहा, “हमें लगा था कि यह छोटी-सी बात है और जल्द ही RWA बन जाएगी. इसके बाद हमें भी सदस्यता मिल जाएगी, क्योंकि एक अपार्टमेंट मालिक के तौर पर यह हमारा अधिकार है. लेकिन यह मामला ऐसी लड़ाई में बदल गया, जो आज तक जारी है.”
गुरुग्राम की कई गेटेड सोसाइटियों में अब यह सवाल तेजी से विवाद का कारण बन रहा है कि निवासियों का प्रतिनिधित्व कौन करेगा और यह तय करने का अधिकार किसके पास होगा कि कौन-सा निवासी सदस्य बनेगा. अपार्टमेंट मालिक खुद को बिल्डरों, RWA पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रहे निवासी समूहों और पंजीकरण व सदस्यता से जुड़े विवादों को सुलझाने के लिए जिम्मेदार सरकारी अधिकारियों के बीच फंसा हुआ पा रहे हैं.
अधिवक्ता संजय लाल ने कहा, “गुरुग्राम में कई अपार्टमेंट मालिकों के लिए RWA या AOA का सदस्य बनना सिर्फ प्रशासनिक समस्या नहीं है. इसकी बड़ी वजह यह है कि हरियाणा में अपार्टमेंट मालिकाना हक से जुड़े कानून, सोसाइटी कानून, RERA के प्रावधान और बिल्डरों द्वारा संभाली जाने वाली मेंटेनेंस व्यवस्था एक-दूसरे से जुड़ गई हैं. लेकिन इन सबको स्पष्ट रूप से जोड़ने वाला कोई साफ कानूनी ढांचा नहीं है.”
RWA की सदस्यता मुख्य रूप से हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ सोसाइटीज एक्ट, 2012 (HRRS Act, 2012) के तहत आती है. इस कानून के अनुसार, RWA या अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) का उद्देश्य अपार्टमेंट मालिकों को अपनी सोसाइटी के प्रबंधन में औपचारिक भूमिका देना है.
लेकिन जमीनी स्तर पर बिल्डरों, पहले से मौजूद RWAs और निवासियों के बीच विवादों ने सदस्यता की पूरी प्रक्रिया को कहीं अधिक जटिल बना दिया है.
सदस्यता के कानून और बढ़ता भ्रम
ऋषि के लिए सदस्यता प्रमाणपत्र का मामला चार साल तक चलने वाली ऐसी लड़ाई बन गया, जिसमें शिकायतें, बहस और अधिकारियों के दफ्तरों के बार-बार चक्कर लगाना शामिल रहा.
बिल्डर से कई बार शिकायत करने और जिला रजिस्ट्रार के कार्यालय के कई चक्कर लगाने के बाद ही निवासियों को पता चला कि एक समिति पहले ही बनाई जा चुकी थी और 2023 में RWA का पंजीकरण भी हो चुका था.
ऋषि ने कहा, “यही वह तरीका था, जिससे बिल्डर और उसकी टीम ने पूरी सोसाइटी को धोखा दिया. RWA पहले से मौजूद थी, फिर भी एक साल से ज्यादा समय तक किसी को इसके बारे में पता नहीं था.” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि पिछली RWA बिल्डर के प्रभाव में बनाई गई थी और आखिरकार 2025 में उसके सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया.
ऋषि ने पिछली RWA के 12 संस्थापक सदस्यों के खिलाफ सदस्यता से कथित तौर पर वंचित किए जाने को लेकर बार-बार शिकायतें दर्ज कराईं.
ऋषि ने कहा, “मैं सिर्फ अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए हर दिन 25 किलोमीटर का सफर कर रहा हूं, लेकिन अधिकारी हमें सिर्फ अगली तारीख और नोटिस दे रहे हैं.”
आनंदा सोसाइटी अकेली ऐसी सोसाइटी नहीं है, जो इस समस्या से जूझ रही है.
गुरुग्राम के सेक्टर 86 स्थित अर्बन होम्स 2 में 1,045 अपार्टमेंट मालिक अब भी RWA या AOA में से किसी एक की सदस्यता मिलने का इंतजार कर रहे हैं. इसकी कहानी 2021 से शुरू होती है, जब बिल्डर ने सोसाइटी के सात लोगों को नामित करके अर्बन होम्स पिरामिड कॉन्डोमिनियम एसोसिएशन का पंजीकरण कराया था. 2024 में इसमें एक और सदस्य जोड़ा गया. इसके बाद सदस्यों के बीच चुनाव कराया गया और RWA का गठन हुआ.
हालांकि, पांच साल बीत जाने के बाद भी 1,045 अपार्टमेंट मालिकों की सदस्यता का मामला अब तक सुलझ नहीं पाया है.

यह मामला अब सोसाइटी के गलियारों से निकलकर सरकारी दफ्तरों तक पहुंच चुका है. जिला रजिस्ट्रार और राज्य रजिस्ट्रार को संयुक्त शिकायत पत्र दिए गए हैं. मामला पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है, जहां घर के मालिक अब समाधान का इंतजार कर रहे हैं.
इस मामले में घर के मालिकों की मदद कर रहीं अधिवक्ता रितु भारियोक ने कहा, “यह प्रशासनिक व्यवस्था की एक खामी है. सैकड़ों लोग एसोसिएशन की सदस्यता के लिए वर्षों से लड़ रहे हैं और इंतजार कर रहे हैं. लेकिन प्रशासनिक दफ्तरों से उन्हें सिर्फ अगली तारीख और बेरुखे जवाब मिलते हैं.”
गुरुग्राम में अपार्टमेंट मालिकों को RWA/AOA की सदस्यता न मिलना सिर्फ कागजी कार्रवाई की समस्या से कहीं बड़ी है. असली समस्या यह है कि कानून में यह साफ तौर पर नहीं बताया गया है कि अपार्टमेंट का मालिकाना हक और एसोसिएशन की सदस्यता आपस में किस तरह जुड़ी होनी चाहिए.
सबसे बड़ी समस्याओं में से एक RWA और AOA को लेकर भ्रम है. गुरुग्राम में इन दोनों शब्दों का इस्तेमाल अक्सर एक-दूसरे के लिए किया जाता है, लेकिन कानूनी तौर पर दोनों अलग-अलग हैं.
हरियाणा अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट के तहत AOA का संबंध सीधे अपार्टमेंट के मालिकाना हक और कॉमन एरिया में मालिक के हिस्से से होता है. वहीं RWA एक अलग कानूनी संस्था होती है, जिसका आमतौर पर HRRS Act के तहत सोसाइटी के रूप में पंजीकरण कराया जाता है. इसी वजह से कभी-कभी किसी अपार्टमेंट मालिक से कहा जा सकता है कि वह फ्लैट का मालिक तो है, लेकिन अभी RWA का “सदस्य” नहीं है.
जिला रजिस्ट्रार के कार्यालय में जमा किए गए शिकायत पत्र हाथ में लिए 36 वर्षीय सत्यानंद शुक्ला ने कहा, “हमने अपनी मेहनत की कमाई और जीवन भर की बचत का इतना पैसा लगाया है, फिर भी हमें अपनी ही सोसाइटी के फैसलों में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं है, क्योंकि हम सदस्य नहीं हैं.”
इन शिकायत पत्रों से बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने और अनुत्तरित सवालों की पूरी कहानी सामने आती है. हर बार जिला रजिस्ट्रार के कार्यालय ने घर के मालिकों को आपसी समझौते के लिए RWA से बात करने को कहा. लेकिन RWA अपने अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं है.
सत्यानंद ने कहा, “हम सदस्यता के लिए अपना समय और पैसा खर्च करके लड़ रहे हैं—जबकि शुरुआत में ही यह ऐसा मुद्दा नहीं होना चाहिए था, जिस पर कोई विवाद खड़ा हो.”
हरियाणा के सोसाइटी कानून के तहत कई अपार्टमेंट एसोसिएशनों का सोसाइटी के रूप में पंजीकरण होना भी भ्रम की एक और परत जोड़ता है.
लाल ने कहा, “यह बात साफ होनी चाहिए. किसी सोसाइटी या RWA को ऐसे नियम बनाने की अनुमति नहीं होनी चाहिए, जो किसी अपार्टमेंट मालिक को उसके अपार्टमेंट के मालिक होने के कारण मिलने वाले अधिकारों को छीन लें.” उन्होंने आगे कहा कि हरियाणा के जटिल आवास संबंधी नियम एसोसिएशनों और अपार्टमेंट मालिकों के बीच विवाद और भ्रम को और बढ़ा रहे हैं.
अधिकारों के लिए लड़ाई
सत्यानंद मारुति सुजुकी के मेंटेनेंस विभाग में काम करते हैं. उनका कहना है कि पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने करियर के किसी भी दूसरे दौर की तुलना में सबसे ज्यादा छुट्टियां ली हैं. लेकिन ये छुट्टियां न तो किसी पारिवारिक आपात स्थिति के लिए थीं और न ही किसी निजी काम के लिए. उन्हें जिला रजिस्ट्रार के कार्यालय जाने, कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेने और अपने उस बुनियादी अधिकार के लिए संघर्ष करने के लिए बार-बार छुट्टी लेनी पड़ी है, जिसे वह अपनी ही सोसाइटी की सदस्यता मानते हैं.
सत्यानंद ने 132 अन्य घर मालिकों के साथ मिलकर 2025 में जिले के एडमिनिस्ट्रेटर-कम-रिटर्निंग ऑफिसर के पास सदस्यता के लिए आवेदन जमा किए थे. ये आवेदन अब भी अधिकारियों के पास लंबित हैं.
सत्यानंद ने कहा, “मैं आमतौर पर तभी छुट्टी लेता हूं, जब मैं बीमार होता हूं या परिवार में कोई जरूरी काम होता है. लेकिन सदस्यता के इस विवाद के कारण मुझे बार-बार छुट्टी लेने के लिए मजबूर होना पड़ा है. एक बुनियादी अधिकार पाने के लिए हम अपना समय, पैसा और मेहनत लगा रहे हैं, जबकि RWA और बिल्डर निवासियों के पैसे से महंगी कानूनी टीमों की मदद ले रहे हैं.”
सदस्यता की यह लड़ाई किसी पद या सदस्य कहलाने के अधिकार के लिए नहीं है. यह उन अधिकारों और जिम्मेदारियों के लिए है, जो सदस्य बनने के साथ मिलते हैं.
सदस्यता मिलने पर अपार्टमेंट मालिकों को वोट देने, सोसाइटी के चुनाव लड़ने, सोसाइटी के ऑडिट और वित्तीय रिकॉर्ड देखने तथा RWA के फैसलों पर सवाल उठाने या उनमें बदलाव की मांग करने का अधिकार मिलता है.
एक अन्य निवासी राजेश कुमार जैन ने कहा, “सब कुछ बिल्कुल साफ है, लेकिन अधिकारी RWA के आठ सदस्यों के सामने सैकड़ों निवासियों की मदद करने के लिए तैयार नहीं हैं. इससे पूरे मामले में उनकी भूमिका पर साफ तौर पर सवाल उठता है.”
उन्होंने आगे कहा, “अगर हमें सदस्यता मिल जाती है, तो हम चुनाव करा सकते हैं और उन्हें हटा सकते हैं. हम सोसाइटी के पैसों से जुड़ी हर जानकारी और यह भी पूछ सकते हैं कि हमारा पैसा कहां और कैसे खर्च किया गया. यही वजह है कि RWA और अधिकारी हमें हमारे अधिकार देने से बच रहे हैं. इसके बजाय हमें हर बार अगली तारीख दे दी जाती है.”
जब सदस्यता का नियंत्रण RWA के पास हो और सदस्यता का विरोध करने वाले निवासियों को अधिकारी समाधान के लिए उसी RWA के पास जाने को कहें, तो मामला एक ऐसे चक्र में फंस जाता है, जिससे निकलना मुश्किल हो जाता है.
सिर्फ वही निवासी चुनाव लड़ सकते हैं, वोट दे सकते हैं और समिति का हिस्सा बन सकते हैं, जो RWA के सदस्य हैं.
60 वर्षीय जैन ने कहा, “RWA पैसे कमाने की मशीन बन गई है और अधिकारियों को लगता है कि अगर उन्होंने हमें वोट देने का अधिकार दे दिया, तो हम उन्हें हटा देंगे.”
RWA के स्टेट मैनेजर सौरभ प्रताप सिंह ने इन आरोपों से इनकार किया. उन्होंने कहा कि RWA हर महीने सदस्यता अभियान चलाती है और हर टावर के नोटिस बोर्ड पर इसकी जानकारी लगाई जाती है. उनका दावा है कि सदस्यता के लिए सबसे हालिया नोटिस जुलाई में लगाया गया था.
हालांकि, दिप्रिंट ने पाया कि RWA के नोटिस बोर्ड या जिन अन्य ब्लॉकों के नोटिस बोर्ड की उसने जांच की, वहां सदस्यता से जुड़ा ऐसा कोई नोटिस मौजूद नहीं था.
सिंह ने कहा, “हमारे पास 50 से ज्यादा सदस्य हैं और जब भी सदस्यता अभियान चलाया जाता है, नोटिस लगाए जाते हैं.”
निवासियों ने ऐसे किसी नोटिस को सोसाइटी के नोटिस बोर्ड पर देखे जाने से इनकार किया. एक अन्य निवासी रत्नेश तिवारी ने कहा, “वे सदस्यता के बारे में कभी कोई नोटिस नहीं भेजते. यहां तक कि सोसाइटी के ऐप पर भी कोई संदेश नहीं भेजा जाता.”
एक थकाऊ प्रक्रिया
ROF आनंदा में दो बेडरूम का अपार्टमेंट रखने वाले ऋषि शुक्ला इस मामले में होने वाली हर गतिविधि पर लगातार नजर रख रहे हैं. RWA के खिलाफ उनकी शिकायतों के बाद अधिकारियों ने जांच की और आखिरकार RWA के सदस्यों को इस्तीफा देना पड़ा.
शुक्ला ने कहा, “RWA और बिल्डरों के बीच मिलीभगत है. वे हमसे पार्किंग के पैसे लेते थे, बिजली की यूनिट भी अंदर ही अंदर बढ़ा दी जाती थीं और हम फिर भी कुछ नहीं कर पाते थे.”

हाथ में कागजों का एक बंडल लिए और फोन पर ईमेल देखते हुए ऋषि अपनी दर्ज की गई शिकायतों और अलग-अलग अधिकारियों को भेजे गए पत्राचार को देखते हैं. वह हर आवेदन, नोटिस और उसके जवाब का रिकॉर्ड रखते हैं. उन्हें अब भी ऐसे चुनाव या सदस्यता प्रक्रिया का इंतिजार है, जिससे अपार्टमेंट मालिकों को सोसाइटी से जुड़े मामलों में औपचारिक रूप से अपनी बात रखने का अधिकार मिल सके.
लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में काम करने वाले कॉर्पोरेट कर्मचारी ऋषि ने कहा, “मेरे पास कानूनी लड़ाई पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं हैं. हम मध्यम वर्गीय परिवारों से हैं. लेकिन जैसे ही मैं कुछ लाख रुपये जुटा पाऊंगा, मैं इस मामले को हाईकोर्ट में ले जाऊंगा.”
ऋषि ने खुद रिसर्च करके हरियाणा रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन ऑफ सोसाइटीज एक्ट और सदस्यता से जुड़े नियमों को समझा है. वह नियमित रूप से गुरुग्राम के अन्य निवासियों, एसोसिएशन के सदस्यों और वकीलों से बात करते हैं, ताकि उन्हें कानूनी सलाह मिल सके और आगे का कोई रास्ता निकल सके.
अधिवक्ता रितु भारियोक ने कहा, “जब तक अधिकारी अपना काम नहीं करते, तब तक इसका कोई समाधान नहीं निकलेगा. वे आसानी से एक जांच टीम बना सकते हैं, मामले की जांच कर सकते हैं और अगर तथ्यों से बात सही साबित होती है, तो अपार्टमेंट मालिकों को सदस्यता दे सकते हैं. लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है और लोगों को वर्षों तक इन लड़ाइयों से जूझना पड़ रहा है.”
एक सफल लड़ाई
सेक्टर 95 से ज्यादा दूर नहीं, गुरुग्राम की एक दूसरी सोसाइटी में सदस्यता को लेकर एक घर मालिक की सफल लड़ाई उन लोगों के लिए उम्मीद जगा रही है, जो इसी तरह के विवादों का सामना कर रहे हैं.
44 वर्षीय रितु सिंह 2022 में किराए के घर से निकलकर सेक्टर 92 की राइजिंग होम्स सोसाइटी में अपने दो बेडरूम के अपार्टमेंट में रहने आई थीं. शुरुआत में सदस्यता उनके लिए कोई प्राथमिकता नहीं थी. उन्हें RWA के कामकाज में कोई खास दिलचस्पी भी नहीं थी. लेकिन सितंबर 2023 की एक शाम सोसाइटी में टहलते समय हुई एक घटना ने उनकी सोच बदल दी.
उन्होंने देखा कि पार्क की हालत ठीक नहीं थी. हरियाली बहुत कम थी, बाउंड्री वॉल के कुछ हिस्से टूटे हुए थे और पैदल चलने वाले रास्तों की हालत भी खराब थी. उन्होंने मेंटेनेंस को लेकर शिकायत करने के लिए RWA के सदस्यों से बात की.
शुक्ला ने कहा, “जैसे ही मैंने RWA से शिकायत की, वे मुझ पर चिल्लाने लगे और कहने लगे कि मैं सदस्य नहीं हूं, इसलिए मुझे शिकायत करने का कोई अधिकार नहीं है. उसी दिन मैंने सदस्य बनने के बारे में सोचना शुरू किया.”
उन्होंने ₹500 की सदस्यता फीस जमा की, फॉर्म भरा और जरूरी प्रक्रिया पूरी की. जो काम शुरू में बहुत आसान लग रहा था, वह जल्द ही एक और विवाद में बदल गया.
रितु सिंह को RWA की ओर से एक ईमेल मिला, जिसमें कहा गया था कि वह बेवजह शिकायतें कर रही हैं और दूसरे निवासियों ने भी उनके खिलाफ शिकायत की है. इसके बाद उनकी सदस्यता का आवेदन खारिज कर दिया गया.
उन्होंने कहा, “उन्होंने मेरी सदस्यता इसलिए खारिज कर दी क्योंकि मैंने सोसाइटी के ग्रुप्स और जिला रजिस्ट्रार के कार्यालय में RWA और उसके कामकाज को लेकर बार-बार शिकायत की थी.”
सितंबर 2025 में शुक्ला ने जिला रजिस्ट्रार के कार्यालय को पत्र लिखना शुरू किया और वहां बार-बार जाने लगीं. उन्होंने कहा, “मैं वहां घंटों बैठी रहती थी, जब तक कोई मुझसे बात नहीं करता और यह नहीं समझाता कि मुझे अपनी सदस्यता कैसे मिलेगी. एक अपार्टमेंट मालिक के तौर पर सदस्यता मेरा अधिकार है.”
कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद जिला रजिस्ट्रार के कार्यालय ने मामले की जांच की और RWA को निर्देश दिया कि वह सिंह को अपार्टमेंट मालिक होने के नाते सदस्यता दे. कार्यालय ने RWA को एक नोटिस भी जारी किया और सात दिनों के भीतर मामले की स्थिति पर लिखित रिपोर्ट देने को कहा.
सिंह ने कहा, “इसमें समय, मेहनत और पैसा लगता है और इसी वजह से RWA को लगता है कि कोई उनके खिलाफ नहीं लड़ेगा. वे तानाशाहों की तरह व्यवहार करने लगते हैं. लेकिन अब समय आ गया है कि लोग अपनी सोसाइटियों में अपने बुनियादी अधिकारों के लिए लड़ें और RWA को याद दिलाएं कि वे सोसाइटी की सरकार नहीं, बल्कि स्वयंसेवक हैं.”
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
यह भी पढ़ें: तारिक की भारत यात्रा पर पेच: ढाका ने हसीना के प्रत्यर्पण और हादी हत्यारोपियों को सौंपने की मांग उठाई