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Wednesday, 19 August, 2026
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26 राज्य, 251 शिकायतें, 21 हजार OTP बेचे: कैसे बना चीन-पाकिस्तान से जुड़ा साइबरक्राइम नेटवर्क

पुलिस के आंकड़ों से पता चलता है कि शिकायतें वित्तीय धोखाधड़ी, 'बॉस स्कैम', यौन रूप से आपत्तिजनक कृत्यों, हैकिंग, यौन रूप से अश्लील सामग्री, बाल यौन शोषण सामग्री आदि से संबंधित हैं। पश्चिम बंगाल से 2 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

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नई दिल्ली: अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच और इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) ने 26 भारतीय राज्यों में चल रहे एक अंतरराष्ट्रीय साइबर क्राइम नेटवर्क का पता लगाया है. पुलिस ने मंगलवार को बताया कि इस नेटवर्क का इंफ्रास्ट्रक्चर चीन और पाकिस्तान से जुड़ा हुआ था.

इस कार्रवाई में पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना से दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है. आरोप है कि वे साइबर अपराधों में इस्तेमाल होने वाले धोखे से हासिल किए गए वन-टाइम पासवर्ड (OTP) उपलब्ध कराकर इस नेटवर्क को चलाने में मदद करते थे.

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच के पुलिस सूत्रों ने बताया कि नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर साइबर अपराध की 251 शिकायतें दर्ज की गई थीं. इनमें “बॉस स्कैम” के नाम से जाने जाने वाले साइबर फ्रॉड के मामले भी शामिल थे. इसमें ठग भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) या सरकारी अधिकारियों की पहचान बताकर WhatsApp या ईमेल के जरिए नुकसान पहुंचाने वाली ZIP फाइल भेजते हैं.

अहमदाबाद शहर के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि इनमें से कुछ शिकायतें अहमदाबाद के लोगों ने दर्ज कराई थीं. इन शिकायतों के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की.

पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की 194 शिकायतें दर्ज की गई थीं, “बॉस स्कैम” की तीन शिकायतें थीं, ऑनलाइन और सोशल मीडिया से जुड़े अपराध की 29 शिकायतें थीं, यौन रूप से स्पष्ट गतिविधियों से जुड़ी पांच शिकायतें थीं, हैकिंग की चार शिकायतें थीं, यौन रूप से अश्लील सामग्री से जुड़ी सात शिकायतें थीं, “किसी अन्य प्रकार” के साइबर अपराध की आठ शिकायतें थीं और बच्चों के यौन शोषण वाली सामग्री से जुड़ी एक शिकायत थी.

कई देशों से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर

पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस गिरोह ने “बॉस स्कैम” समेत कई तरह के साइबर अपराध किए.

इस स्कैम में WhatsApp या ईमेल के जरिए भेजी गई नुकसान पहुंचाने वाली ZIP फाइलों की मदद से हैकर WhatsApp अकाउंट पर कब्जा कर लेते थे, कंपनी के बॉस बनकर लोगों से बात करते थे और वित्तीय टीमों को बड़ी रकम ट्रांसफर करने के लिए धोखा देते थे.

I4C और अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच की ओर से की गई तकनीकी और नेटवर्क जांच के मुताबिक, आरोपियों द्वारा इस्तेमाल किए गए मालवेयर को चीन से जुड़े साइबर अपराधियों ने विकसित किया होने का शक है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इसका इस्तेमाल पाकिस्तान के इस्लामाबाद में स्थित एक कॉल सेंटर के जरिए भारतीय नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया गया.

अधिकारी ने बताया कि साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल किए गए बैंक खातों को चीन आधारित VPN सर्विस के जरिए एक्सेस किया गया था.

अधिकारी ने कहा, “इन जानकारियों के आधार पर शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अपनी पहचान और असली जगह छिपाने के लिए चीन, भारत, पाकिस्तान और हांगकांग से जुड़े कई देशों के साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया.”

पुलिस ने बताया कि इस संयुक्त कार्रवाई से 10,000 से ज्यादा संक्रमित डिवाइस सुरक्षित किए गए और बॉस स्कैम जैसे साइबर फ्रॉड के कारण भारतीय नागरिकों को करोड़ों रुपये के संभावित नुकसान से बचाया गया. इसके अलावा, सहयोग पोर्टल के जरिए पहचाने गए मालवेयर को नियमित रूप से ब्लॉक किया जा रहा है.

21,000 OTP बेचे

इन स्कैम को चलाने के लिए गिरोह को स्थानीय भारतीय फोन नंबरों की जरूरत थी. ये नंबर उन्हें पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किए गए दो लोगों, इमरान अली पियादा और इंजामुल, से मिले.

पियादा टेलीकॉम सेल्स एजेंट था. उसने ग्राहकों के बायोमेट्रिक डेटा का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना डमी SIM कार्ड एक्टिवेट करने के लिए किया. वह इन SIM कार्ड को फोन में डालकर OTP बनाता था और उन्हें साइबर अपराधियों को भेज देता था, ताकि वे फर्जी WhatsApp, शॉपिंग और गेमिंग अकाउंट एक्टिवेट कर सकें.

जांच में सामने आया कि पांच साल में पियादा ने Amazon और Flipkart जैसी ई-कॉमर्स साइटों के करीब 21,000 OTP 100 रुपये प्रति OTP के हिसाब से बेचे और 21 लाख रुपये से ज्यादा कमाए. उसने WhatsApp एक्टिवेशन के लिए 900 OTP भी 250 रुपये प्रति OTP के हिसाब से बेचे और 2.25 लाख रुपये और कमाए.

इंजामुल BA ग्रेजुएट है और वह सीधे विदेश में बैठे साइबर अपराधियों के साथ संपर्क और तालमेल करता था.

पुलिस की 4,500 फर्जी SIM कार्ड की जांच में इन संदिग्धों का संबंध 26 राज्यों में दर्ज 251 आधिकारिक शिकायतों से पाया गया.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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