चिनाब नदी के किनारे रहने वाली 23 साल की युवती ने कहा, “अगर हम इसका तल लगातार छोटा करते रहेंगे, तो यह जरूर हमारे घरों में घुसेगी. इसे गुस्साई नदी कैसे कह सकते हैं, गलती नदी की नहीं है.”
स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि ब्यास नदी के किनारे अतिक्रमण सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि मौसमी बाढ़ के प्रभावों को भी और बुरा बना देता है.
चौदह मिलियन शरणार्थी, तथा 25 मिलियन लोग तीव्र भूखमरी का सामना कर रहे हैं, यह दुनिया के लिए सूडान में व्याप्त अराजकता को समाप्त करने के लिए पर्याप्त कारण होना चाहिए - भले ही इसके शासकों की क्रूरता पर्याप्त कारण न हो.
कई अन्य भारतीय मूल के नेताओं के उलट, उन्होंने ईसाई धर्म नहीं अपनाया और न ही अपनी भारतीय पहचान को कम दिखाया. वैसे भी उनके लिए ऐसा करना मुश्किल होता क्योंकि उनकी मां मीरा नायर भारत की जानी-मानी फिल्म निर्देशक हैं.
आलोचनाओं के बावजूद, व्यावहारिक राजनीति ने बिहार में वामपंथ को टिकाए रखा है, जैसा कि 2020 के चुनाव परिणामों में दिखा. और वह भी ऐसे समय में जब देश के बाकी हिस्सों में उसकी मौजूदगी कुछ छोटे इलाकों तक सिमट गई है.
यह एक छोटी सी शुरुआत है, लेकिन बिहार की कहानी के लिए एक बड़ी जीत है. और राजनेता इसका इस्तेमाल यह दिखाने के लिए कर रहे हैं कि बदलाव शुरू हो गया है। इसे आने में बहुत समय लगा है.
शास्त्री नगर मार्केट पिछले 30 सालों से मेरठ में बढ़ती और फलती-फूलती रही, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बुलडोज़र चल गए. कुछ लोग इसे अवैध कहते हैं, तो कुछ इसे ‘ऑर्गेनिक’ यानी अपने आप बना हुआ बाज़ार बताते हैं.
20 साल की नीतीश सरकार के बाद भी, बिहार देश का सबसे कमज़ोर परफॉर्मेंस देने वाला राज्य बना हुआ है. स्वास्थ्य और शिक्षा में भारी बजट बढ़ोतरी के बावजूद रैंकिंग सबसे नीचे है.
इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.