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Sunday, 8 February, 2026
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चिनाब का बदलता चेहरा— मोहब्बत की नदी कैसे ‘टाइम बम’ में तब्दील हो गई

चिनाब नदी के किनारे रहने वाली 23 साल की युवती ने कहा, “अगर हम इसका तल लगातार छोटा करते रहेंगे, तो यह जरूर हमारे घरों में घुसेगी. इसे गुस्साई नदी कैसे कह सकते हैं, गलती नदी की नहीं है.”

जो ब्यास नदी कभी शांत रहती थी, वह अब उग्र क्यों हो रही है?

स्थानीय लोगों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने कहा कि ब्यास नदी के किनारे अतिक्रमण सिर्फ स्थानीय समस्या नहीं है, बल्कि मौसमी बाढ़ के प्रभावों को भी और बुरा बना देता है.

ऑटो, ट्रक और डिलीवरी कामगारों का सोशल मीडिया सफर — भारत में उभरते वर्किंग-क्लास इन्फ्लुएंसर्स

सोशल मीडिया पर पेंटर, राजमिस्त्री, निर्माण श्रमिक, मजदूर, डिलीवरी बॉय, ट्रक ड्राइवर, सभी बेबाकी से अपने कार्य-जीवन को अपना रहे हैं.

सूडान साबित करता है कि जब दुनिया ख़ूनी शासकों पर लगाम नहीं लगाती, तो नतीजे कितने भयानक होते हैं

चौदह मिलियन शरणार्थी, तथा 25 मिलियन लोग तीव्र भूखमरी का सामना कर रहे हैं, यह दुनिया के लिए सूडान में व्याप्त अराजकता को समाप्त करने के लिए पर्याप्त कारण होना चाहिए - भले ही इसके शासकों की क्रूरता पर्याप्त कारण न हो.

ज़ोहरान ममदानी आधुनिक भारत की असली पहचान हैं

कई अन्य भारतीय मूल के नेताओं के उलट, उन्होंने ईसाई धर्म नहीं अपनाया और न ही अपनी भारतीय पहचान को कम दिखाया. वैसे भी उनके लिए ऐसा करना मुश्किल होता क्योंकि उनकी मां मीरा नायर भारत की जानी-मानी फिल्म निर्देशक हैं.

आदर्शों और अस्तित्व के बीच: क्यों बिहार में वामपंथ अब भी कायम है और कैसे चुनावी ज़मीन मजबूत की

आलोचनाओं के बावजूद, व्यावहारिक राजनीति ने बिहार में वामपंथ को टिकाए रखा है, जैसा कि 2020 के चुनाव परिणामों में दिखा. और वह भी ऐसे समय में जब देश के बाकी हिस्सों में उसकी मौजूदगी कुछ छोटे इलाकों तक सिमट गई है.

बक्सर का एथनॉल प्लांट — बीजेपी का चुनावी हथियार. क्या यह लोगों की ज़िंदगी बदल रहा है?

यह एक छोटी सी शुरुआत है, लेकिन बिहार की कहानी के लिए एक बड़ी जीत है. और राजनेता इसका इस्तेमाल यह दिखाने के लिए कर रहे हैं कि बदलाव शुरू हो गया है। इसे आने में बहुत समय लगा है.

बुलडोज़रों ने मेरठ के ‘कनॉट प्लेस’ को ढहा दिया. मास्टर प्लान बनाम अपने आप बढ़े बाज़ारों की कहानी

शास्त्री नगर मार्केट पिछले 30 सालों से मेरठ में बढ़ती और फलती-फूलती रही, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बुलडोज़र चल गए. कुछ लोग इसे अवैध कहते हैं, तो कुछ इसे ‘ऑर्गेनिक’ यानी अपने आप बना हुआ बाज़ार बताते हैं.

बिहार में ‘विकास राज’ कैसा चल रहा है? सड़कें चमकीं, लेकिन क्लासरूम में दरारें, क्लीनिकों की हालत खराब

20 साल की नीतीश सरकार के बाद भी, बिहार देश का सबसे कमज़ोर परफॉर्मेंस देने वाला राज्य बना हुआ है. स्वास्थ्य और शिक्षा में भारी बजट बढ़ोतरी के बावजूद रैंकिंग सबसे नीचे है.

गर्भवती और ‘जिद्दी’—दिल्ली पुलिस की कॉन्स्टेबल ने भारतीय सोच से लड़कर जीता पावरलिफ्टिंग में मेडल

सोनिका यादव ने कहा, ‘परिवार बोला मैं धारा के खिलाफ जा रही हूं. उन्होंने कहा खेल का मैदान बच्चों के लिए है, मेरे जैसी बड़ी महिलाओं के लिए नहीं.’

मत-विमत

‘हाल मुकाम’ में बेदखली: इंडिया आर्ट फेयर में मलबे से निकली लाल ईंटें और उनसे बनी एक बेचैन दुनिया

इंडिया आर्ट फेयर में सबसे ज़्यादा चर्चा में रहने वाला आर्टवर्क किसी परिभाषा में नहीं बंधता—गिरजेश कुमार सिंह मलबे से निकाली गई ईंटों से लोगों और उनके बैग की मूर्तियां बनाते हैं. इस प्रदर्शनी का नाम 'हाल मुकाम' है.

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पंजाब के अमृतसर से 25 किलोग्राम हेरोइन बरामद की, दो लोग गिरफ्तार

चंडीगढ़, आठ फरवरी (भाषा) पंजाब के अमृतसर में दो लोगों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 25 किलोग्राम हेरोइन के साथ ही हथियार व...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.