बिहार चुनाव में एक साल का समय हैं और लालू यादव की आरजेडी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही हैं जेडीयू मुसलमानों को अपने पक्ष में करना चाह रही है. लेकिन जेडीयू की सहयोगी भाजपा उसके रास्ते में है.
कांग्रेस के गढ़ अमेठी कमजोर होता देख उन्होंने अब पाला बदलने का फैसला किया है.हालांकि ये कोई पहली बार नहीं है.सजय सिंह इससे पहले भी बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़े थे और जीत भी दर्ज की थी.
मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान दिसंबर 2018 में भी यह बिल लोक सभा पास हो गया था, पिछले साल अगस्त में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने इस पर सख्त कानून बनाने का फैसला किया था.
राजद नेताओं का कहना है कि लालू यादव आरएसएस के 'स्नूपिंग’ मुद्दे के बाद जद (यू) -भाजपा गठबंधन पर नजर रखे हुए हैं क्योंकि पार्टी को महागठबंधन फिर से ज़िंदा होने की उम्मीद है.
ममता ने कहा कि सभी राजनीतिक पार्टी भाजपा जैसी नहीं है, मेरी पार्टी तृणमूल कांग्रेस बहुत ही गरीब पार्टी है. इसलिए हम लगातार चुनाव प्रक्रिया में सुधार की बात कर रहे है.
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण चुनाव जीतने की संभावना बढ़ाने के लिए किया गया लगता है, लेकिन एक बड़ा कानूनी सवाल है: क्या इससे उन पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है?