कानून-व्यवस्था के बिगड़ने के डर से यह आदेश ऐसे समय में जारी किए गए हैं, जब शिवसैनिक सीएम उद्धव ठाकरे के समर्थन में राज्य भर में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं.
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि विधायकों ने निजी कारणों का हवाला देते हुए अपने सुरक्षा अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को चकमा दिया, ताकि सरकारी तंत्र उनकी योजनाओं को न भांप सके.
महाराष्ट्र के गृहमंत्री दिलीप वालसे पाटिल ने कहा कि, 'न तो मुख्यमंत्री और न ही गृह विभाग ने किसी विधायक की सुरक्षा वापस लेने के आदेश दिए हैं. ट्विटर के माध्यम से लगाए जा रहे आरोप झूठे और पूरी तरह से निराधार हैं.'
ऐसा लगता है कि ठाकरे सरकार का लक्ष्य या तो सरकार को बचाने के लिए विद्रोहियों को धमकाना है या फिर वह विधानसभा भंग करना चाहती है. उधर बीजेपी वेट एंड वॉच मोड पर है.
उद्धव ठाकरे के संबोधन के एक दिन बाद गुरुवार को, पार्टी के संस्थापक बाल ठाकरे के बेटे, सीएम के लिए अपना समर्थन दिखाने के लिए पार्टी के सैकड़ों कार्यकर्ता शिवसेना भवन में एकत्र हुए.
ओपीएस और ईपीएस को 2016 में पार्टी प्रमुख जे. जयललिता के निधन के बाद स्थापित दोहरे नेतृत्व की एक इनोवेटिव अवधारणा के तहत अन्नाद्रमुक का समन्वयक और सह-समन्वयक बनाया गया था.
नामांकन के लिए पीएम मोदी ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा जिसका रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने समर्थन किया. इसके बाद दूसरे सेट के प्रस्तावकों में बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्री थे.
अगर सरकार टैक्सपेयर्स का पैसा देश को बेहतर बनाने में खर्च करना चाहती है, तो ज्यादा अदालतें बनाए, टूटती हुई नौकरशाही को सुधारे, लेकिन, ज़ाहिर है, नेता सिर्फ अपने बारे में सोचेंगे.