बागी शिवसेना खेमे का दावा है कि विधायक कभी मुख्यमंत्री से मिल तक नहीं पाते थे और उन्हें ‘उद्धव के करीबी कुछ लोगों’ के जरिये उनसे संपर्क साधना पड़ता था. उन्होंने एमवीए में अपने साथ ‘सौतेले व्यवहार’ का आरोप भी लगाया है.
संजय राउत ने कहा कि संख्या बल कागज में ज्यादा हो सकती है लेकिन अब यह लड़ाई कानूनी लड़ाई होगी. हमारे जिन 12 लोगों ने बगावत शुरू की है उनके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की है.
भाजपा का मानना है कि वह महाराष्ट्र में सरकार बनाने से महज एक कदम दूर रह गई है लेकिन फिलहाल अपने पत्ते चलने में वो पूरी सावधानी बरत रही है—और एमवीए सरकार के अपने आप ही गिरने का इंतजार कर रही है.
एकनाथ शिंदे द्वारा विद्रोह करने के बाद गुरुवार को उद्धव ठाकरे ने पार्टी के विधायकों की एक मीटिंग बुलाई जिसमें 55 में से सिर्फ 13 विधायकों ने हिस्सा लिया.
शिवसेना नेता राउत ने कहा, 'उद्धव ठाकरे बहुत जल्द वर्षा बंगले में वापस आएंगे. गुवाहाटी के 21 विधायकों ने हमसे संपर्क किया है और जब वे मुंबई लौटेंगे, तो वे हमारे साथ रहेंगे.'
विधायकों ने पत्र में कहा है कि राज्य में शिवसेना का मुख्यमंत्री होने के बावजूद पार्टी के विधायकों को वर्षा बंगला (मुख्यमंत्री आवास) जाने का अवसर नहीं मिला. सीएम के आसपास के लोग तय करते थे कि हम उनसे मिल सकते हैं या नहीं. हमें लगा कि हमारा अपमान किया गया है.
शिवसैनिकों को संदेश देते हुए सामना में लिखा है कि आपने तय किया तो सभी लोग हमेशा के लिए ‘भूतपूर्व’ हो सकेंगे. इसके पहले की बगावतों का इतिहास यही कहता है. समय रहते सावधान हो जाओ, समझदार बनो!
गैर-भाजपा दलों की तरफ से वोट मिलने को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भाजपा ‘अलोकतांत्रिक और खतरनाक’ रास्ते पर चल रही है.
मुख्यमंत्री पद छोड़ने की पेशकश के कुछ घंटों बाद महाराष्ट्र के उद्धव ठाकरे बुधवार रात दक्षिण मुंबई के अपने आधिकारिक आवास से उपनगरीय बांद्रा स्थित पारिवारिक आवास 'मातोश्री' चले गए हैं.