हालांकि दो बार की सीएम को इस चुनाव में बीजेपी के सीएम उम्मीदवार के रूप में पेश नहीं की गई हैं, लेकिन वह राज्य में पार्टी के सबसे लोकप्रिय चेहरे के रूप में शीर्ष पद के लिए दावेदार बनी हुई हैं.
मीना कुमारी ने अलवर ग्रामीण सीट से अपने पिता बीजेपी के जयराम जाटव के खिलाफ निर्दलीय चुनाव लड़ा. जाटव भी कांग्रेस प्रतिद्वंद्वी टीकाराम जूली से पीछे चल रहे हैं.
विजयवर्गीय ने चुनाव लड़ने के लिए नामांकित किये जाने पर आश्चर्य जताया था. इस बीच, उनके प्रतिद्वंद्वी, कांग्रेस के संजय शुक्ला ने बार-बार उन्हें 'बाहरी' कहा.
मध्यप्रदेश में शिवराज सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं बीजेपी के लिए गेम चेंजर साबित हुई. लाडली बहना योजना के चलते महिलाएं भारतीय जनता पार्टी की ओर आकर्षित हुई.
केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा उत्तराखंड, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, गुजरात, गोवा, असम, त्रिपुरा, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश में सत्ता में है और आज जारी मतगणना के रुझान यदि परिणामों में बदल जाते हैं तो वह MP में सत्ता बरकरार रखेगी और राजस्थान, छत्तीसगढ़ को कांग्रेस से छीन लेगी.
एमपी चुनाव के नतीजे सीएम चौहान के नेतृत्व और लोकप्रियता के स्पष्ट समर्थन के रूप में आए हैं. केंद्रीय नेतृत्व अब शीर्ष पद के लिए उनके दावे को अनदेखी नहीं करेगा.
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बाद नरोत्तम मिश्रा दूसरे नंबर के नेता माने जाते हैं, वह राज्य का एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरा है. लेकिन उन्होंने अपने करियर में कई विवादों को जन्म दिया है.
लोकतांत्रिक सुधारों के लिए काम करने वाले थिंकटैंक एडीआर के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020-21 के दौरान सपा ने कुल 561.46 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी, जो 2021-22 में 1.23 फीसदी बढ़कर 568.369 करोड़ रुपये हो गई.
भाजपा ने खान को टिकट देने से इनकार कर दिया और उनकी जगह जितेंद्र जोधा को मैदान में उतारा, जो 2018 के चुनाव में जाट नेता डूडी से 40,602 वोटों के अंतर से हार गए थे.