जेएमएम की बिहार इकाई के प्रभारी प्रणव कुमार ने बताया, ‘बिहार में जेएमएम कुल 40 सीटों पर आरजेडी को फायदा पहुंचा सकता है. यहां आदिवासी वोटर हैं. जिन 12 सीटों पर हम दावा कर रहे हैं, वहां पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे हैं.’
बिहार में ज्यादातर विपक्षी दलों के पास वर्चुअल रैलियों के लिए धन और लोगों, दोनों की ही कमी है. यदि पारंपरिक रैलियां प्रतिबंधित रहीं तो इसका मतलब होगा 'अमीर पार्टियों का फायदे में रहना'.
अगर एनडीए बिहार जीत लेता है तो वह ये कह पाएगा कि कोराना और चीन के मामले में उसकी नीतियों को जनता का समर्थन हासिल है. इसका फायदा उसे पश्चिम बंगाल समेत अन्य आने वाले विधानसभा चुनावों में भी होगा.
पुराने तरीके की ‘टच-एंड-फील’ राजनीति में यकीन करने वाले नेता कोविड संकट के कारण वोटरों तक पहुंचने के अधिक तकनीकी तरीके अपनाने की दुविधा का सामना कर रहे हैं.
पंच का अपने प्लश टॉय से लगाव उसके देश से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले आराम से है. इसी तरह, ग्राहक जियोपॉलिटिकल लेबल से ज्यादा भरोसे और डिजाइन को प्राथमिकता देते हैं.