Monday, 24 January, 2022
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बिहार चुनाव : जेएमएम ने मांगी 12 सीटें, आरजेडी ने कहा- मीडिया में नहीं तय होगा सीटों का बंटवारा

जेएमएम की बिहार इकाई के प्रभारी प्रणव कुमार ने बताया, ‘बिहार में जेएमएम कुल 40 सीटों पर आरजेडी को फायदा पहुंचा सकता है. यहां आदिवासी वोटर हैं. जिन 12 सीटों पर हम दावा कर रहे हैं, वहां पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे हैं.’

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रांची: बीते 8 जून को बिहार के सीएम नीतीश कुमार जनता दल यूनाइटेड की बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन मीटिंग ले रहे थे. साफ कहा कि चुनाव के लिए कार्यकर्ता तैयार रहें. इधर तेजस्वी यादव 8 जून को ही एक दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव का जन्मदिन मनाने पटना से रांची पहुंच गए थे. राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (रिम्स) के जेल वार्ड में धूमधाम से जन्मदिन भी मनाया गया. इसके बाद तेजस्वी सीएम हेमंत सोरेन से भी मिलने पहुंचे.

ठीक 18 दिन बाद रिम्स के सामने की गली में स्थित झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय कार्यालय में महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने ताल ठोक कर कहा कि बिहार चुनाव में जेएमएम 12 सीट मांग रही है. उसे पूरा भरोसा है कि इतनी सीटें उसे मिल जाएंगी. उन्होंने इन सीटों पर दावा किया और कहा कि इन इलाकों में हम फर्क ला सकते हैं.

जेएमएम की बिहार इकाई के प्रभारी प्रणव कुमार ने बताया, ‘बिहार में जेएमएम कुल 40 सीटों पर आरजेडी को फायदा पहुंचा सकता है. यहां आदिवासी वोटर हैं. जिन 12 सीटों पर हम दावा कर रहे हैं, वहां पिछले चुनाव में तीसरे स्थान पर रहे हैं.’

ताल ठोकने की वजह को समझिये. आरजेडी को 2019 झारखंड विधानसभा चुनाव में सात सीटें मिली थीं जिसमें एक सीट पर उसे जीत हासिल हुई थी. उस एक सीट पर जीत हासिल करने वाले नेता सत्यानंद भोक्ता फिलहाल झारखंड सरकार में रोजगार एवं श्रम मंत्री हैं. ये अलग बात है कि कोरोना काल में मजदूरों की घर वापसी, उनके रोजगार, उनका बॉर्डर पर सड़क निर्माण के लिए जाने का सारा क्रेडिट सीएम के खाते चला गया.


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आरजेडी की तिलमिलाई सी प्रतिक्रिया

आरजेडी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने कहा, ‘आप ही लोग के द्वारा हमलोग बात करेंगे जी. ये बात होती है आमने-सामने की. अखबार के माध्मय से दलों की राजनीति की बात होती है. गलतफहमी आप लोग हटाइये अपनी.’ इतना कहके उन्होंने फोन काट दिया.

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दोबारा फोन करने पर कहा, ‘फोन कटा नहीं था, मैंने काट दिया था. जेएमएम के इसी मसले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के सवाल पर कहा कि वो क्या करते हैं, इससे हमारा लेना-देना नहीं है. जब बात होगी, तब देखी जाएगी.’

वहीं जेएमएम महासचिव सुप्रीयो भट्टाचार्य ने दिप्रिंट से कहा कि, ‘ताली एक हाथ से नहीं बजती है, दोनों हाथ से बजती है. हमने उन्हें सात सीटें दी लेकिन उन्हें एक सीट पर जीत मिली. तब भी उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया गया. जिन सीटों पर दावा कर रहे हैं, उसके लिए अनौपचारिक तौर पर तेजस्वी यादव से बात हुई है. जब औपचारिक तौर पर बात आगे बढ़ेगी तब और बातें सामने आएंगी.’

अच्छा नहीं रहा है बिहार में जेएमएम का प्रदर्शन

जेएमएम बीते 2015 बिहार विधानसभा चुनाव में पार्टी अध्यक्ष शीबू सोरेन ने पहले तो 50 सीटों पर लड़ने का दावा किया था लेकिन 32 सीटों पर लड़ी और सभी हार गई. इन सभी सीटों पर कुल 1,03,946 वोट मिले. यानी मात्र 2.02 प्रतिशत वोट ही वह हासिल कर पाई.

चुनाव से पहले वह बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे जेडीयू-आरजेडी गठबंधन में शामिल होने के लिए हेमंत सोरेन लगातार प्रयास करते रहे. नीतीश कुमार से बात-मुलाकात की, लेकिन बात बनी नहीं. इसके बाद झारखंड की सीमा से लगे विधानसभा क्षेत्रों में उसने अपने कैंडिडेट उतार दिए और स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ा था.

यही नहीं, 2010 के विधानसभा चुनाव जिसमें आरजेडी को करारी हार मिली थी और वह 22 सीटों पर सिमट गई थी, तब भी जेएमएम को कोई खास सफलता नहीं मिली थी. कुल 41 सीटों पर चुनाव लड़ी और एक में जीत हासिल हुई थी. पार्टी को कुल 1,76,400 वोट मिले थे. यानी पूरे राज्य में पड़े कुल वोट का 3.50 प्रतिशत ही उसे हासिल हुआ.

इस एक सीट हासिल करने वाले किसी समय नीतीश के सबसे खास मित्र रहे और लालू यादव को राजनीति में लाने वाले नरेंद्र सिंह के बेटे सुमित कुमार सिंह थे. हालांकि कुछ ही दिनों बाद सुमित सिंह ने पार्टी छोड़ पहले जनता दल (एकीकृत) और फिर इसके बाद जीतन राम मांझी की पार्टी हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा में शामिल हो गए. जहां उनके पिता नरेंद्र सिंह पहले से पद संभाल रहे थे.

फिलहाल जिन सीटों पर दावा किया जा रहा है, उसमें बांका, तारापुर, कटोरिया, झाझा, चकाई, बेलहर, ठाकुरगंज, पूर्णिया, धमदाहा, कोढ़ा, जमालपुर और रुपौली शामिल हैं. इसमें चकाई सीट पर 2010 विधानसभा चुनाव में पार्टी को जीत मिली थी.

एक बार फिर नीतीश ले सकते हैं हेमंत से राजनीतिक बदला

यहीं नहीं, बीते बिहार विधानसभा चुनाव (2015) में जेएमएम को बिहार में पार्टी का सिंबल ‘तीर-धनुष’ नहीं में जेडीयू के सिंबल ‘तीर’ चुनाव को आयोग से निरस्त करा दिया था. संभावना इस बार भी यही है कि जेएमएम को बिहार चुनाव में पार्टी सिंबल नहीं मिल पाएगा.

एक बार फिर सुप्रियो भट्टाचार्य कहते हैं, ‘पार्टी को वहां सिंबल नहीं मिलने जा रहा है. यह बड़ी समस्या नहीं है, जो भी निशान मिलेगा उस पर लड़ाई लड़ी जा सकती है.’

उन्होंने पुख्ता तैयारी की बात की लेकिन यह नहीं बताया कि पार्टी ने क्या तैयारी की है.


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वहीं प्रणव कुमार कहते हैं ‘पिछली बार अलग-अलग कैंडीडेट को अलग-अलग चुनाव चिन्ह मिले थे. इस बार हम कोशिश कर रहे हैं कि जो भी चुनाव चिन्ह मिले, वह एक ही सबको मिले. हालांकि, तीर-धनुष छाप को बिहार में मान्यता दिलाने का मसला अभी भी कोर्ट में ही है.’

243 सीटों वाली बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारी सभी पार्टियों ने शुरू कर दी है. राजनीतिक उठापटक भी शुरू हो गए हैं. आरजेडी के पांच विधान पार्षद (एमएलसी) पार्टी छोड़ जेडीयू में शामिल हो चुके हैं. पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद ने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है. इन सब के बीच गठबंधन दल जेएमएम का सबसे पहले आगे आकर 12 सीटों पर दावा करना, शायद यही वजह है कि पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह ने खीझ मीडिया पर निकाल दी.

(आनंद दत्ता स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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