अवामी लीग को अभी इस सवाल का जवाब नहीं चाहिए कि हसीना के बाद कौन होगा या यह बहस कि हसीना को बांग्लादेश लौटना चाहिए या नहीं, बल्कि ज़मीन पर नया नेतृत्व चाहिए.
जो भी चीज़ लोगों को अपने लवर को कविताएं भेजने का साहस देती हैं, वह एक वायरल बुखार की तरह फैल रही है. और इसमें सबसे बड़ा बदलाव लाने वाला कौन है? ChatGPT.
क्या किसी ने सच में यह जांचा कि चर्च जाने के बावजूद उन्होंने हिंदू रीति-रिवाज़ बनाए रखे थे या नहीं? यह पता नहीं है, क्योंकि इसके लिए किसी व्यक्ति की निजी ज़िंदगी में और गहरी जांच करनी पड़ती, और कोई भी राज्य इतने लोगों की निजी ज़िंदगी में इतना अंदर तक नहीं जा सकता.
लोकतंत्र की ‘रेटिंग’ करना एक जोखिम भरा काम है. मैं केवल इस सीधी-सी कसौटी को लागू करता हूं—कहां सबसे शांतिपूर्वक तथा सामान्य ढंग से राजनीतिक सत्ता का निरंतरता के साथ बदलाव होता रहा है.
LPG की कमी से गरीब भारतीय परिवारों के कोयले के इस्तेमाल वाले दिनों में लौटने का खतरा पैदा हो गया है—ठीक उसी दौर में, जिसे मोदी सरकार ने चरणबद्ध तरीके से खत्म किया था.
अफगानिस्तान, कैमरून, म्यांमार और सूडान का सिलेक्शन सवाल खड़ा करता है. खासकर तब जब इस समय ब्रिटेन में शरण मांगने वालों में पाकिस्तानियों की संख्या सबसे ज्यादा में से एक है.
जहां आलोचक PM मोदी पर ईरान संकट को लेकर देश की आज़ादी और भारत के नैतिक मूल्यों को छोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं डीक्लासिफाइड डॉक्यूमेंट्स से पता चलता है कि उनके सामने जो मुश्किलें हैं, वे नई नहीं हैं.
कोई यह नहीं कहता कि पंजाब को नहर सुधार में हुई असली प्रगति छिपानी चाहिए, लेकिन धीरे-धीरे हो रहे सुधार की जानकारी देना और उसे बड़ी उपलब्धि बताकर पेश करना—दोनों में फर्क है.
केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी को नागालैंड में वंदे मातरम को लेकर वहां के विचारों पर चुप रहना पड़ेगा, अगर वह उस राज्य में सत्ता में बने रहना चाहती है, जहां 2028 की शुरुआत में चुनाव होने हैं.
मुझे लिखित संदेश मिला कि कानू सान्याल अपना ‘प्रतिनिधिमंडल’ मेरे पास भेजना चाहते हैं. उम्मीद की जा रही थी कि अपने उग्र समर्थकों के साथ आ रहे दुबले-पतले गुस्सैल बूढ़े आदमी के साथ बेहद तीखी मुठभेड़ होगी.