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Saturday, 7 March, 2026
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मत-विमत

असम के डांगारी मामले में 24 साल बाद आए फ़ैसले पर ख़ुश होने की ज़रूरत नहीं है

असम के तिनसुकिया ज़िले के डांगारी में हुई हत्याओं के लिए सात रिटायर्ड फ़ौजियों को आजीवन क़ैद की सज़ा सुनाई गई. पर क्या ये आरोपियों और भारतीय सेना के बीच कोई गुपचुप समझौता है?

संवाद कीजिए ताकि पब्लिक हमारे रिपब्लिक को चोट न पहुंचाए

साधारण, आस्थावान भारतीय आलोचना और सुधार से अछूते नहीं हैं मगर जब यह विदेशी और उग्र भाषा में सामने आता है तब वे प्रतिकार...

नरेंद्र मोदी से ज्यादा अमित शाह के लिए अहम है अगला लोकसभा चुनाव

अगला लोकसभा चुनाव अमित शाह के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है. वे वाकई चाणक्य हैं या नहीं, यह 2019 के चुनाव...

सीबीआई भारत की प्रमुख जांच एजेंसी की जगह भस्मासुर बन गई है

सीबीआई में आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच के विवाद ने इस संस्था की प्रतिष्ठा, विश्वसनीयता और छवि को गर्त में मिला दिया...

सुनो लड़कियों, तुम मंदिर क्यों जाना चाहती हो?

महिलाओं की मुक्ति की कहानी मंदिरों में नहीं, मार्केट, स्कूल-कॉलेजों और वर्क प्लेस में लिखी जा रही है और इसमें उनका सबसे बड़ा साथी भारत का संविधान है.

#मीटू के आलोचकों से बरखा दत्त का सवाल, तवलीन सिंह का जवाब

बरखा ने पूछा, मर्दों को जवाबदेह बनाने की जगह महिलाओं पर सवाल क्यों? तवलीन ने कहा, अधिकार पीड़ित बनकर नहीं, लड़कर मिलते हैं.

अगली औद्योगिक क्रांति में भारत दुनिया को ‘स्तब्ध’ कर देगा

मोदी के चौथी औद्योगिक क्रांति में भारत के योगदान संबंधी दावे को उनकी आदतन अतिशयोक्तियों में गिन सकते हैं. लेकिन इसकी संभावनाओं पर विचार किया जाना चाहिए.

भारतीयों और उनके भगवान के बीच पुजारी नहीं बन सकता है सुप्रीम कोर्ट

सबरीमाला एक सबक है कि एक शक्तिशाली संस्था जब आस्था से संबंधित मसलों की व्याख्या करते हुए क़ानून तथा संविधान के सिद्धांतों को आंख...

#मीटू के इस दौर में अंग्रेजों के जमाने वाले आपराधिक मानहानि कानून को भी ख़त्म किया जाय

आपराधिक मानहानि का सहारा लेकर पहले अंबानी और अडानी अपनी आलोचना करने वालों को चुप कराते थे. अब अकबर और आलोक नाथ इसका इस्तेमाल...

हरियाणा और पंजाब में बाबाओं का राज क्यों है?

अगर संदर्भ इतना मज़बूत नहीं होता तो हम इस सवाल को और अधिक कठिन पाते: हमारे देश के किस हिस्से में प्रति वर्ग किलोमीटर सबसे अधिक स्वयंभू बाबा हैं?

मत-विमत

भारतीय उदारवादियों को धर्म के बारे में फिर से सोचने की जरूरत है. जड़ से कटा हुआ मॉडल असरदार नहीं है

पश्चिमी लिबरलिज़्म अधिकारों से शुरू होता है और समाज को पीछे की ओर डिज़ाइन करता है. धर्म रिश्तों से शुरू होता है. यह मानता है कि आप ज़िम्मेदारियों के जाल में पैदा हुए हैं, और यह जाल एक तोहफ़ा है.

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राजनीति

देश

सरकार इंफाल को जोड़ने वाली रेल परियोजना समय पर पूरी करने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री

इंफाल, सात मार्च (भाषा) मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने कहा है कि उनकी सरकार राज्य की राजधानी को पूरे देश के रेल...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.