नीतीश कुमार ने हमेशा दूसरों की बैसाखी पर विशुद्ध सहुलियत भरी राजनीति की है। अब उनका सामना मोदी-शाह की तानाशाही वाली भाजपा से हुआ, तो इनके होश उड़े हुए हैं
अगर प्रधानमंत्री इन व्हाट्सएप अफवाहों का शिकार न होने का अनुरोध करते हैं तो इससे कुछ फर्क पड़ सकता है। लेकिन कोई भी उनसे ऐसा करने के लिए नहीं कह रहा है। नरेंद्र मोदी के समक्ष यह पूछने में कई हफ्ते लग जाते हैं कि किसी मुद्दे पर प्रधानमंत्री चुप क्यों हैं।
फिल्म में मीडिया को बहुत बुरे रूप में दर्शाया गया है क्योंकि समाचार पत्रों ने दत्त के जीवन को बर्बाद कर दिया है। समाचार सुर्ख़ियों के सवालिया निशान उन्हें असहाय छोड़ते हुए उन्हें दोषी ठहराते हैं
मोदी की राजनयिक 'जीत' पुरानी हो गई है और भारत के विदेशी संबंध पूरी तरह असफल दिखाई देते हैं। यहाँ बताया गया है कि सरकार के गलत कदमों ने किस तरह से उनकी गति पर विराम लगा दिया है।
बाजार-उन्मुख सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे ले जाने के लिए एकमात्र रास्ता है। लेकिन व्यावसायिकों की असफलताओं ने इस प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न कर दी है