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Friday, 23 January, 2026
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वाजपेयी, नवाज़ और मेरे बीच एक राज़ की बात जो अब भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है

नवाज़ शरीफ़ ने वाजपेयी से शांतिपूर्ण संबंध स्थापित करने की पूरी कोशिश की थी लेकिन सेना उनके आड़े आ गयी. इमरान के लिए हालात अलग नहीं होने वाले.

फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रॉन से क्या सीख सकते हैं नरेंद्र मोदी

‘सूट बूट की सरकार’ से तुलना किये जाने के बावजूद मैक्रॉन ने फ्रांस की आर्थिक प्रगति को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं

जब वाजपेयी ने लाल चौक पर झंडा फहराने को बेकरार भीड़ को होशियारी से संभाला

समस्या यह थी कि बड़ी संख्या में जम्मू पहुंचे कार्यकर्ताओं को श्रीनगर जाने से कैसे रोका जाए व बिना श्रीनगर गए नाराज़ कार्यकर्ताओं को वापिस घर कैसे भेजा जाए

चार मौक़े जब मुझे वाजपेयी जी से डाँट सुनने को मिली: शेखर गुप्ता

तीन बार मैंने उनकी नहीं सुनी और तीनों बार वो बात हमने हंस के टाल दी । मैं तो कहूंगा कि ये उनका बड़प्पन था जो उन्होंने वो बात हंस के टाल दी

क्या भारत को फिर नसीब होगा एक उदारवादी जन-जन का नेता?

आज कांग्रेस वैसी ही लग रही है जैसी वह 1915 में थी। 1915 में गांधी द्वारा कांग्रेस बनाई और बदली गयी थी

मोदी नहीं तो कौन? जानिए इस सवाल पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं मोदी के आलोचक

2019 में अगर मोदी नहीं तो फिर कौन? अधिकांश सामाजिक बैठकों का यह एक ऐसा अहम सवाल है जिसके कई जवाब हैं।

मुल्क़ मूवी में मुसलमानों को आतंकी न दिखाकर बॉलीवुड ने दिखाई दिलेरी

अनुभव सिन्हा की फिल्म मुल्क सन्नी देओल कृत फिल्मों, जिनमें मुस्लिमों को अक्सर आतंकवादियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, पर कड़ा प्रहार करती है

आईएमएफ की रिपोर्ट पढ़ कर मोदी सरकार को अब खिल उठना चाहिए

नोटबंदी और कृषि उत्पादों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की वजह से वित्त का महत्व बढ़ जाता है, 7.75 प्रतिशत की विकास दर पाने की सोच कई बार कुछ ज्यादा ही हो जाती है

अमिताभ बच्चन का स्टारडम भारतियों को शौचालय पहुँचाने के लिए पर्याप्त नहीं

कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को इच्छुक शौचालय उपयोगकर्ताओं में बदलने का होना चाहिए, न कि यह कि अमिताभ बच्चन उन्हें खुले में शौच के लिए शर्मिंदा कर सकें

क्या अमित शाह होंगे 2024 में भाजपा से प्रधानमंत्री उम्मीदवार ?

पार्टी अध्यक्ष पहले से ही राज्य सभा के माध्यम से स्वयं को सरकार की आवाज बना रहे हैं

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जनसंख्या का डर, ‘बिमारू’ की सोच और फ्रीज सीटें: जनगणना 2027 खोलेगी परतें

यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.

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राजनीति

देश

कश्मीर के गुलमर्ग और अन्य इलाकों में बर्फबारी

श्रीनगर, 22 जनवरी (भाषा) कश्मीर घाटी के प्रसिद्ध स्की रिसॉर्ट गुलमर्ग और कुछ अन्य क्षेत्रों में बृहस्पतिवार को बर्फबारी हुई, वहीं श्रीनगर और...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.