ट्विंकल खन्ना और अक्षय कुमार जिस तरह से अपनी राजनैतिक ब्रांडिंग का लाभ उठाते हैं , उसके मद्देनज़र उन्हें बॉलीवुड के किम कार्दशियन और कान्ये वेस्ट कहना गलत नहीं होगा.
यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.