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Thursday, 22 January, 2026
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मत-विमत

चीन पर लगाम कसना कितना मुमकिन है?

जब ब्याज दरें ऊपर चढ़ रही हैं, अमेरिका में मंदी ट्रम्प की आक्रामकता को कुंद कर देगी और अंत में चीन ही है जो फायदे में रहेगा.

मोदी इफेक्ट: विचारधारा से बड़ा दिख रहा है चुनावधारा का तक़ाज़ा

मोदी-भाजपा को 2019 में मात देनी है तो यह ताकतवर नेताओं को उनके गढ़ों में हराकर ही दी जा सकती है क्योंकि चुनावी विश्लेषण के लिहाज से यही तर्कपूर्ण दिखता है, चाहे विचारधारात्मक विरोध का तक़ाज़ा कुछ भी हो.

हमें कांचा इलैया शेफर्ड को क्यों पढ़ना चाहिए?

प्रोफेसर कांचा इलैया को पढ़ना इसलिए ज़रूरी है क्योंकि वे मुख्यधारा के समानांतर अपना एक प्रतिपक्ष यानी काउंटर नैरेटिव खड़ा करते हैं. ऐसे वैचारिक संघर्षों से ही दुनिया में ज्ञान का विकास हुआ है. उन्हें पढ़ने के लिए उनसे सहमत होना बिल्कुल ज़रूरी नहीं है.

पटेल के परिवार के उन लोगों की कहानी जो राजनीति में आए

सरदार पटेल के परिवार के चार सदस्यों ने लोकसभा चुनाव लड़ा था. सरदार पटेल यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि उनका परिवार उनके नाम का...

‘अब नेताओं के भाषण सिर्फ़ वयस्कों के लिए हैं’

अपने को निचले तबके का कहने वाले प्रधानमंत्री मोदी से लेकर अमेरिका में पढ़े शशि थरूर तक की ज़बान का अनियंत्रित होना चिंता का विषय है.

भारत के चैम्पियन सेक्टरों में गहराया मुनाफ़े का संकट

उड्डयन, दूरसंचार, ई-कॉमर्स/ डिजिटल कारोबार, सबमें कामयाबी की कहानियां लिखी जा रही हैं लेकिन इन तीनों क्षेत्रों में मुद्दा एक ही है- मुनाफ़े का

डोभाल जी, डरिए मत, गठबंधन की कमज़ोर सरकारों ने ज़्यादा मज़बूत फ़ैसले लिए

इंदिरा से मोदी तक का सबक यह कहता है कि मज़बूत, ठोस बहुमत वाली सरकार नेताओं को लापरवाह, अहंकारी बना देती है और असहनीय व्यक्तिपूजा को बढ़ावा देती है.

असम के डांगारी मामले में 24 साल बाद आए फ़ैसले पर ख़ुश होने की ज़रूरत नहीं है

असम के तिनसुकिया ज़िले के डांगारी में हुई हत्याओं के लिए सात रिटायर्ड फ़ौजियों को आजीवन क़ैद की सज़ा सुनाई गई. पर क्या ये आरोपियों और भारतीय सेना के बीच कोई गुपचुप समझौता है?

संवाद कीजिए ताकि पब्लिक हमारे रिपब्लिक को चोट न पहुंचाए

साधारण, आस्थावान भारतीय आलोचना और सुधार से अछूते नहीं हैं मगर जब यह विदेशी और उग्र भाषा में सामने आता है तब वे प्रतिकार...

नरेंद्र मोदी से ज्यादा अमित शाह के लिए अहम है अगला लोकसभा चुनाव

अगला लोकसभा चुनाव अमित शाह के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती है. वे वाकई चाणक्य हैं या नहीं, यह 2019 के चुनाव...

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जनसंख्या का डर, ‘बिमारू’ की सोच और फ्रीज सीटें: जनगणना 2027 खोलेगी परतें

यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.

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राजनीति

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केंद्र ने आईआईटी-कानपुर में छात्रों की आत्महत्याओं की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) केंद्र सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर में छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं की समीक्षा करने और...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.