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Thursday, 22 January, 2026
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वे 31 विशेषाधिकार जिनके लिए राहुल गांधी ब्राह्मण बनने को बेकरार हैं

मंदिर मंदिर घूम रहे राहुल गांधी खुद को कौल ब्राह्मण बता रहे हैं. उन्हें गोत्र संबंधी पहचान की ज़रूरत क्यों पड़ी, जबकि उनकी एक ग्लोबल पहचान है.

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट में अब कांग्रेस से ज़्यादा भाजपा की दिलचस्पी है

सच्चर कमेटी रिपोर्ट की कहानी में हाल के वर्षों में एक नया मोड़ आया है. कांग्रेस ने इससे खुद को पूरी तरह अलग कर लिया है.

2019 में भाजपा को हराने के लिए विपक्ष को वीपी​ सिंह जैसे आइकॉन की जरूरत है

अगले लोकसभा चुनाव में विपक्ष को वीपी सिंह जैसे नेता की जरूरत है जो दलितों, पिछड़ों और दूसरे उत्पीड़ित समूहों को साथ ला सके.

राम मंदिर तो बहाना है, उन्हें भावनाओं को भुनाना है

यह नहीं कहा जा सकता कि अयोध्या में 25 नवंबर को जो कुछ हुआ, वह साधु-संतों का स्वतःस्फूर्त प्रयास था क्योंकि धर्मसभा के लिए भीड़ जुटाने में भाजपा नेता भी पूरी तरह सक्रिय थे.

राज्य चुनावों की तुलना में संसदीय चुनाव में भाजपा बे​हतर स्थिति में है

मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस के पक्ष में स्विंग का मतलब यह नहीं है कि मई में संसदीय चुनावों के समय भी इन राज्यों में ऐसा ही होगा.

शिवराज के मध्य प्रदेश में उत्पादन में इजाफे के साथ-साथ किसानों का गुस्सा भी बढ़ा है

एक दशक से भारत के सबसे अधिक कृषि विकास दर करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान को आराम से बैठा होना चाहिए था. लेकिन वे संघर्ष कर रहें हैं क्योंकि हमारी कृषि अर्थव्यवस्था और राजनीति में खोट है.

दुश्मन नए हथियार के साथ सामने खड़ा है, भारतीय सेना को जागने की ज़रूरत है

जैश-ए-मोहम्मद के दो स्नाइपर जोड़े घाटी में घुस आए हैं. जबकि हम अपने स्नाइपर निशानेबाज़ों में ज़रूरी कुशलता विकसित नहीं कर पाए हैं.

दीपिका पादुकोण ने अपने ठहाके से सामाजिक बेड़ियां तोड़ दीं

अपनी शादी पर ठहाके लगाती हुई फोटो साझा कर दीपिका पादुकोण ने सदियों पुराने रोती हुई दुल्हन वाले रिवाज़ को चकनाचूर कर दिया है.

धर्मनिरपेक्ष राजनीति अपने ही पापों का ख़ामियाज़ा भुगत रही है

सेक्युलर होने से ही भारत का होना है, लेकिन सेक्युलर सिद्धांतों को बचाने के लिए ज़रूरी है कि हम सेक्युलर राजनीति के पाखंडों का पर्दाफ़ाश करें.

लालू यादव ने वंचित जनता को स्वर्ग नहीं, लेकिन स्वर ज़रूर दिया

लालू यादव के सत्ता में आने से वंचित जातियों में ये एहसास आया कि उनके बीच का या उनके प्रति हमदर्दी रखने वाला कोई ऊपर बैठा है.

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जनसंख्या का डर, ‘बिमारू’ की सोच और फ्रीज सीटें: जनगणना 2027 खोलेगी परतें

यह समझने के लिए कि 1971 को भारत की संसदीय सीटों का आधार क्यों बनाया गया, 1960 के दशक के उस माल्थसवादी डर को फिर से देखना होगा, जो विकास से जुड़ी सोच पर हावी था.

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बजट में रोजगार-सृजन, निर्यात समर्थन को प्राथमिकता दिए जाने की जरूरतः फिक्की सर्वे

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (भाषा) वैश्विक व्यापार तनावों में बढ़ोतरी के बीच आगामी बजट में रोजगार सृजन को बढ़ावा देने और निर्यात को...

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सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.