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Thursday, 22 January, 2026
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चुनावी विवेक बनाम चुनावी दंभ पर केंद्रित होगा 2019 का मुक़ाबला

गैर-कांग्रेसवाद एक पुरानी और परिपक्व राजनीतिक विचारधारा है लेकिन गैर-भाजपावाद की राजनीति को लोकसभा चुनाव 2019 में अभी परिपक्व होना है.

पाकिस्तान धर्म के आधार पर नागरिकता नहीं देता, पर भारत के इस तरफ झुकने का ख़तरा है

जस्टिस एसआर सेन की टिप्पणी ने दक्षिण एशिया में मुसलमानों को लेकर देश के विभाजन के दौरान अधूरी रह गई एक बहस को फिर से शुरू कर दिया है.

तंदूर कांड के मुजरिम को महात्मा बनाने पर क्यों तुला है मीडिया?

सुशील शर्मा पर हत्या और अपनी पत्नी की लाश को तंदूर में जलाने का आरोप सिद्ध है, लेकिन मीडिया को लगता है कि वह महात्मा है.

बीजेपी नेताओं में क्यों मची है हनुमान की जाति बताने की होड़?

योगी आदित्यनाथ ने हनुमान की जाति बताने की जो शुरुआत की, वह अब जंगल में आग की तरह फैल गई है. हर दिन कोई नेता हनुमान की नई जाति बता रहा है.

अमित शाह कार्यकर्ताओं को कमतर आंक रहे हैं लेकिन वही 2019 में ले डूबेंगे

बीजेपी के अंदरखाने में सबकुछ ठीक नहीं है. उसके सांसद, विधायक और कार्यकर्ता हर कोई भ्रम में है और एक दूसरे की टांग खींचने में लगा है.

प्रस्तावित गंगा एक्ट में बांध निर्माण और खनन पर रोक की कोई बात नहीं है

गंगा एक्ट आएगा और पूरे प्रचार के साथ आएगा. लेकिन उसके तथ्यों पर विचार का समय नहीं मिलेगा, क्योंकि देश चुनावी महोत्सव में व्यस्त होगा.

‘न्यू इंडिया’ की योजना: अगर ख्वाहिशों के पंख होते तो भिखमंगे घोड़ों की सवारी करते

परिभाषिक दृष्टि से देखें तो चार साल से भी कम समय में ‘न्यू इंडिया’ यानी नया भारत के निर्माण की उम्मीद पर संदेह ही किया जाएगा.

संबित पात्रा की एक प्रशिक्षित सर्जन से अक्खड़ टीवी स्टार तक की यात्रा

संबित पात्रा भाजपा की उस बौद्धिकता-विरोधी प्रवृत्ति का उदाहरण हैं जिसपर फेक न्यूज़ फैलाते हुए पकड़े जाने का कोई असर नहीं होता.

मोदी सरकार 14 एम्स बनाने की घोषणा कर चुकी है, बने कितने?

क्या एम्स का निर्माण भी एक जुमला है? नरेंद्र मोदी सरकार के आने के बाद जिन एम्स की घोषणा हुई, उनमें से एक का भी काम पूरा नहीं हो पाया.

मनमोहन सिंह अब बोलने लगे हैं ,उन्हें राहुल गांधी को अर्थशास्त्र का पाठ पढ़ाना चाहिए

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह इन दिनों बोल रहे हैं और बहुत खूब बोल रहे हैं और भारत उन्हें सुन रहा है, तो बेहतर हो कि राहुल भी उन्हें सुनें.

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मौनी अमावस्या और पीएम मोदी—भारत की सोची-समझी चुप्पी के क्या मायने हैं

वैश्विक शोर-शराबे के माहौल में भारत का प्रतीकात्मक ‘मौनव्रत’ कूटनीति का सबसे प्रभावी साधन है. यह नई दिल्ली की रणनीतिक अस्पष्टता को बनाए रखता है.

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पिता को जिला परिषद का टिकट न मिलने से नाराज व्यक्ति ने राकांपा विधायक के कार्यालय के बाहर पेशाब किया

लातूर (महाराष्ट्र), 21 जनवरी (भाषा) लातूर जिले में बुधवार को एक व्यक्ति ने अगले महीने होने वाले जिला परिषद (जेडपी) चुनावों के लिए अपने...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.