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Wednesday, 14 January, 2026
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मोदी सरकार भी किसानों को नगद नारायण के अलावा कुछ देने का सोच नहीं सकती

बहरहाल, पिछले पांच वर्षों में देश में प्रति व्यक्ति आय के आंकड़े में एक तिहाई अंक की वृद्धि हुई, जैसी किसी और देश में नहीं हुई.

रोहित वेमुला रिटर्न्स: फिर से उबल रहे हैं कैंपस

देश भर के विश्वविद्यालय 2019 के आरंभ में एक बार फिर उसी तरह से सुलग रहे हैं जिस तरह से रोहित वेमुला का संस्थानिक हत्या के बाद 2016  में सुलगे थे. दोनों ही परिस्थितियों में कई समानताएं हैं.

लोकसभा चुनाव से पहले भ्रष्टाचार विरोधी माहौल बनाने के लिए भाजपा को वाड्रा से आगे सोचना होगा

कांग्रेस के प्रथम परिवार के भ्रष्टाचार से मालामाल होने संबंधी आम धारणा का आने वाले महीनों में काफी असर होगा.

ओला का बरसना चिंता की बात, पर्यावरण संकट की तरफ बढ़ रही है दुनिया

फ़रवरी के महीने में दिल्ली व देश के अन्य हिस्सों में यूं ओला का बरसना ख़ुशी की नहीं चिंता की बात है, यह तेजी...

राफेल सौदा मामले में भाजपा सरकार खुद को पाक-साफ साबित कर ही बच सकती है

मोदी सरकार को राफेल सौदे में खुद को बेदाग साबित करते हुए कहना चाहिए था कि वह वायुसेना के लिए सौदा जल्दी चाहती थी इसलिए अफसरशाही की आपत्तियों को खारिज किया.

बहनजी की बनवाई मूर्तियां इतनी जलन क्यों पैदा करती हैं?

क्या सभी नेताओं को मूर्तियों व पार्कों को बनवाने पर आया खर्च वापस करना होगा? पब्लिक के पैसे की बर्बादी का नियम क्या सिर्फ मायावती पर लागू होता है?

ईसीए को खत्म करने पर ही कृषि आय बढ़ सकेगी

भारत में औपचारिक गोदामों और अन्नागारों की कमी में आवश्यक वस्तु अधिनियम निर्मित भय के माहौल की भूमिका देखी जा सकती है.

अब संस्कृत को भी सांप्रदायिकता के चश्मे से देखा जा रहा है

अब देश में जनता को सेक्यूलरिज़्म की ओवरडोज पिलाई जा रही है. हरेक चीज में मीनमेख निकालना कहां तक उचित माना जाएगा.

सवर्ण तुष्टीकरण में नरेंद्र मोदी से आगे निकलना चाहते हैं राहुल गांधी

महिला आरक्षण विधेयक को मौजूदा स्वरूप में पारित करने से ओबीसी और माइनॉरिटी के लोग नाराज हो सकते हैं. लेकिन ऊंचे वादे करने की होड़ में राहुल ये जोखिम उठा रहे हैं.

जाति प्रधान देश में बॉलीवुड जाति पर बात करने से शर्माता है

अमेरिका ने इस बात को समस्या के रूप में स्वीकार किया है कि वहां की फिल्मों में परदे पर और परदे के पीछे अश्वेत और हिस्पैनिक्स लोगों का प्रतिनिधित्व कम है. भारत में ये बहस अभी मुमकिन ही नहीं है.

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जेन-Z आंदोलन के बाद फिर पुरानी राजनीति, नेपाल की पार्टियां ‘स्टार्टिंग पॉइंट’ पर लौटीं

एक स्थिर नेपाल के लिए आगे का रास्ता लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने, समावेशी संवाद के जरिए राजनीतिक स्थिरता सुनिश्चित करने और कानून के शासन को बनाए रखने में है.

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‘अष्टलक्ष्मी’ कारीगरों ने तैयार किया गणतंत्र दिवस के ‘जलपान कार्यक्रम’ समारोह का निमंत्रण पत्र

नयी दिल्ली, 13 जनवरी (भाषा) पूर्वोत्तर राज्यों की विशिष्ट 'अष्टलक्ष्मी' परंपराओं को प्रदर्शित करने वाला, अष्टकोणीय बांस की बुनाई के पैटर्न में बना एक...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.