भीमा-कोरेगांव की 200वीं वर्षगांठ पर जिन्होंने कहा कि महार सैनिकों ने अंग्रेजों के पक्ष में लड़ाई की थी, वही सारागढ़ी में सिख सैनिकों की बहादुरी को सलाम करते हैं.
आखिर क्या कारण है कि जिस नरेन्द्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने की बात जोर-शोर से हो रही है उनकी पार्टी बीजेपी अपनी जीती हुई सीटों पर चुनाव नहीं लड़ पा रही है?
यह समझने की जरूरत है कि आदिवासी इलाकों की राजनीति के मुद्दे देश के अन्य इलाकों से भिन्न होते हैं. आदिवासी राजनीतिक से ज्यादा, अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे हैं.
अगर राहुल गांधी इतने ही बेकार हैं कि वे इस सरकार के लिए एक 'एसेट' और विपक्ष के लिए एक 'लायबिलिटी' की तरह काम करते हैं, तो फिर सरकार उन्हें ख़बरों में बनाए रखने के लिए इतनी ज़ोर-शोर से कोशिश क्यों कर रही है?