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Thursday, 30 April, 2026
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‘चुनाव आयोग यह चुनाव निष्पक्ष कराने में पूरी तरह से विफल रहा है’

चुनाव आयोग अपने कामकाज में एक हद तक स्वायत्त रहा है, जो कि इस देश की ज़्यादातर संस्थाओं के मामले में शायद ही देखने को मिलता है.

बीएसपी के युवराज आकाश आनंद का स्वागत करें, हो गई है ताजपोशी

चुनाव आयोग ने बीएसपी अध्यक्ष मायावती के चुनाव प्रचार पर 48 घंटे की रोक लगाकर एक ऐसी चुनौती पेश कर दी, जिसका सामना करने के लिए बहनजी ने भतीजे आकाश आनंद को मैदान में उतार दिया.

बीजेपी के निशाने पर यूपी में कांग्रेस, 22 का खेल 42 पर ख़तरा

बीजेपी के लिए ये 22 प्रतिशत वोट बड़ा भरोसा हैं. 2014 में इसी 22 प्रतिशत के सहारे उसने करीब 42 प्रतिशत वोट और 71 सीटें बटोरी थीं.

यूपी में बीजेपी विरोधी सेकुलर वोटों के असली हकदार सपा-बसपा-रालोद

उपचुनावों के नतीजों से साफ है कि उत्तर प्रदेश में भाजपा का मुकबला सपा-बसपा गठबंधन से है. अगर कोई जादू न हुआ तो कांग्रेस खेल से बाहर है.

परिवारवाद की राजनीति में केसीआर, पवार और नायडू से 1 कदम आगे हैं देवगौड़ा

कर्नाटक में देवगौड़ा के समर्थकों तक का मानना है कि उन्हें अब सिर्फ अपने खानदान के राजनीतिक भविष्य की चिंता है.

कन्हैया ने कैसे जुटाया 70 लाख रु. और राजू यादव क्यों हुए नाकाम

क्राउडफंडिंग में सफल होने के लिए लोगों को जानना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी ये भी है कि आप किन लोगों को जानते हैं और कौन आपको जानता है और उनकी हैसियत कितनी है.

‘यादव’ जाति का वोट बैंक यूपी-बिहार में सांप्रदायिकता नहीं फैलने दे रहा!

अगर केंद्रीय चुनाव के हिसाब से देखें तो यही यादव वोट सांप्रदायिकता के खिलाफ दो पार्टियों का हथियार बनकर उभरे हैं.

नमक से पहले पानी: आंबेडकर का महाड़ मार्च बनाम गांधी का दांडी मार्च

महाड़ सत्याग्रह आज भी अपनी अंतिम विजय की प्रतीक्षा कर रहा है. जाति के विनाश के साथ ही महाड़ सत्याग्रह अपनी अंतिम परिणति तक पहुंचेगा.

रॉ की क्षमता बढ़ाने के लिए उसे सीआईए के पैटर्न को अपनाना होगा

पॉलिसी बनाने वालों को पारंपरिक सोच से बाहर निकल कर कुछ क्रिएटिव रिफॉर्म लाना चाहिए. बिना मानव संसाधन की मदद लिए खुफिया बदलाव लाना अधूरा होगा.

आरा के ‘सर्वदलीय उम्मीदवार’ राजू यादव को लेकर इतना सन्नाटा क्यों हैं भाई!

शोले फिल्म का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई.’ आरा से बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे सीपीआई (एमएल) कैंडिडेट को लेकर यही सवाल मीडिया से पूछा जाना चाहिए.

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अरविंद केजरीवाल को उस राजनीति की कीमत चुकानी पड़ रही है, जिसे उन्होंने खुद गढ़ा था

मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?

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दिल्ली पुलिस ने चोरी के कई मामलों में शामिल युवक को गिरफ्तार किया, 30 लाख रुपये का माल बरामद

नयी दिल्ली, 30 अप्रैल (भाषा) दिल्ली के शाहदरा जिले में चोरी की कई वारदात में शामिल 34 वर्षीय युवक को गिरफ्तार करके उसके पास...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.