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Thursday, 30 April, 2026
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गरीबों को जब ‘न्याय’ नहीं मिल रहा, तो ये नेता उनके घर जाकर दावत उड़ाने में क्यों लगे हैं?

संबित पात्रा ऐसे पहले नेता नहीं हैं जो गरीब के घर खाना खा रहे हैं. उनसे पहले भी राष्ट्रीय पार्टियां ये चुनावी ट्रिक इस्तेमाल कर चुकी हैं.

उत्तर प्रदेश के नाराज ब्राह्मण इस बार किस पार्टी के साथ?

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के पास तीन विकल्प हैं. या तो बीजेपी के साथ बनें रहें या कांग्रेस में विकल्प तलाशें. तीसरा विकल्प है कि जिस भी पार्टी का मजबूत ब्राह्मण कैंडिडेट हो, उसका समर्थन करें.

इस लोकसभा चुनाव में, इन सात घातक मिथकों से बचें

यह लोकसभा चुनाव मात्र नरेंद्र मोदी या राहुल गांधी को लेकर नहीं है. मतदाता अन्य राजनीतिक दलों या निर्दलीयों का भी समर्थन कर सकते हैं.

हार्दिक के चुनाव लड़ने पर रोक क्या जनांदोलनों की मौत की इबारत है?

अंग्रेजी राज के समय से ही जनांदोलनों में मुकदमा होना या निचली अदालतों में सजा हो जाना कोई दुर्लभ बात नहीं है. निचली अदालतों के आदेश के आधार पर चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिए जाने के कानून पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए.

महाराष्ट्र की राजनीतिः बेगानी शादी में राज ठाकरे दीवाना

शरद पवार की कोशिश से सेकुलर गठबंधन ने राज ठाकरे को सीट भले ही न दी हो उन्हें भाषण के लिए मौका देने का फैसला किया है.

आप हिंदू राष्ट्रवादी और आंबेडकरवादी दोनों ही हो सकते हैं

यदि साम्यवादियों की वर्तमान पीढ़ी को आंबेडकरवाद पर एकाधिकार की अनुमति दी जाती है, तो यह डॉ. बीआर आंबेडकर की विरासत के साथ अन्याय होगा.

भाजपा के घोषणापत्र में परिणाम से ज़्यादा काम पर ज़ोर और नीति पर ध्यान नहीं

चुनाव घोषणापत्र मोदी के विकास पर नज़रिए को रेखांकित करता है: कितने जन धन खाते खुले, परिणाम - इन खातों में कितनी लेन-देन हुआ.

प्योर हिन्दी बोल नहीं पाता, व्हाट शुड आई डू सर? युवाओं के बीच हिंदी की दुर्दशा

कहा जा रहा है हिन्दी एक कठिन भाषा है, चुनांचे वह सर्वग्राही नहीं. अगर यह सच है तो युवाओं में शुद्ध हिन्दी बोलने सुनने की उत्कंठा क्यों?

भारत नहीं, कोलंबिया यूनिवर्सिटी में पढ़ाई जाती है डॉ. भीमराव आम्बेडकर की आत्मकथा

आम्बेडकर की आत्मकथा के बारे में जानिए जो उन्होंने 1935-36 में लिखी. यह कोलंबिया विश्विद्यालय में पढ़ाई जाती है और उसके बारे में भारत में काफी कम चर्चा हुई.

मादरेवतन गमगीन न हो, दिन अच्छे आने वाले हैं, पाजियों और मक्कारों को हम सबक सिखाने वाले हैं!

देश और समाज के लिए सबके अपने-अपने सपने थे, जिन्हें जनता के बीच ले जाया जाता था और उन्हें पूरा करने के लिए वोट मांगे जाते थे.

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अरविंद केजरीवाल को उस राजनीति की कीमत चुकानी पड़ रही है, जिसे उन्होंने खुद गढ़ा था

मोदी सरकार अरविंद केजरीवाल के साथ जो कर रही है, वह गलत है. लेकिन क्या मोदी सरकार कभी अस्तित्व में आती, अगर केजरीवाल और उनके 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' आंदोलन ने UPA को तबाह न किया होता?

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ओडिशा विधानसभा के विशेष सत्र में कंकाल प्रकरण को लेकर हंगामा

भुवनेश्वर, 30 अप्रैल (भाषा) ओडिशा विधानसभा में बृहस्पतिवार को ‘भारतीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी’ विषय पर चर्चा के लिए आयोजित विशेष सत्र के...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.