अब जब असमानता बढ़ रही है तो विशेष अवसर का सिद्धांत जिसे भारत में आरक्षण कहा जाता है, को और मज़बूत करने की ज़रूरत है, जिस पर हाल फ़िलहाल में सबसे ज़्यादा हमला हुआ है.
कांग्रेस के कई वादे शायद पूरे नहीं किये जा सकते. अगर एक राष्ट्रीय दल व्यक्तिगत स्वाधीनता का इस तरह खुल कर पक्ष ले रहा है तो इसका खुले दिल से स्वागत किया जाना चाहिए.
अगर समाजवादी पार्टी सचमुच लोहियावाद पर चल रही होती, तो वह किसी जाति के लिए नया रेजिमेंट बनाने का वादा करने की जगह, जाति नाम वाले तमाम रेजिमेंट को भारत रेजिमेंट में बदलने की मांग करती.
आज करीब 20 नेता अपने भौगोलिक क्षेत्र तथा राजनीतिक दायरे में इतने ताकतवर हैं कि मोदी समेत कोई भी राष्ट्रीय नेता उनके वोट बैंक में सेंध नहीं लगा नहीं सकता.
मोदी सरकार केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद भी अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना एवं प्रसारण मंत्री रह चुके हैं.मनीष तिवारी 2012-13 में केंद्रीय मंत्री थे.
बिहार के राजनीतिक महत्व से कौन नहीं अवगत होगा. ये उन तीन राज्यों (बाकी दो पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश हैं) में से है जहां चुनाव के सातों चरणों में वोटिंग होगी.
औपनिवेशिक खुफिया तंत्र क्रांतिकारियों को व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि खतरे के रूप में दर्ज करता था. ऐसा करके उसने कई ज़िंदगियों को इतिहास से निष्कासित कर दिया.