scorecardresearch
Thursday, 5 February, 2026
होममत-विमत

मत-विमत

परिवारवाद की राजनीति में केसीआर, पवार और नायडू से 1 कदम आगे हैं देवगौड़ा

कर्नाटक में देवगौड़ा के समर्थकों तक का मानना है कि उन्हें अब सिर्फ अपने खानदान के राजनीतिक भविष्य की चिंता है.

कन्हैया ने कैसे जुटाया 70 लाख रु. और राजू यादव क्यों हुए नाकाम

क्राउडफंडिंग में सफल होने के लिए लोगों को जानना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी ये भी है कि आप किन लोगों को जानते हैं और कौन आपको जानता है और उनकी हैसियत कितनी है.

‘यादव’ जाति का वोट बैंक यूपी-बिहार में सांप्रदायिकता नहीं फैलने दे रहा!

अगर केंद्रीय चुनाव के हिसाब से देखें तो यही यादव वोट सांप्रदायिकता के खिलाफ दो पार्टियों का हथियार बनकर उभरे हैं.

नमक से पहले पानी: आंबेडकर का महाड़ मार्च बनाम गांधी का दांडी मार्च

महाड़ सत्याग्रह आज भी अपनी अंतिम विजय की प्रतीक्षा कर रहा है. जाति के विनाश के साथ ही महाड़ सत्याग्रह अपनी अंतिम परिणति तक पहुंचेगा.

रॉ की क्षमता बढ़ाने के लिए उसे सीआईए के पैटर्न को अपनाना होगा

पॉलिसी बनाने वालों को पारंपरिक सोच से बाहर निकल कर कुछ क्रिएटिव रिफॉर्म लाना चाहिए. बिना मानव संसाधन की मदद लिए खुफिया बदलाव लाना अधूरा होगा.

आरा के ‘सर्वदलीय उम्मीदवार’ राजू यादव को लेकर इतना सन्नाटा क्यों हैं भाई!

शोले फिल्म का एक मशहूर डायलॉग है कि ‘इतना सन्नाटा क्यों है भाई.’ आरा से बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ रहे सीपीआई (एमएल) कैंडिडेट को लेकर यही सवाल मीडिया से पूछा जाना चाहिए.

गरीबों को जब ‘न्याय’ नहीं मिल रहा, तो ये नेता उनके घर जाकर दावत उड़ाने में क्यों लगे हैं?

संबित पात्रा ऐसे पहले नेता नहीं हैं जो गरीब के घर खाना खा रहे हैं. उनसे पहले भी राष्ट्रीय पार्टियां ये चुनावी ट्रिक इस्तेमाल कर चुकी हैं.

उत्तर प्रदेश के नाराज ब्राह्मण इस बार किस पार्टी के साथ?

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों के पास तीन विकल्प हैं. या तो बीजेपी के साथ बनें रहें या कांग्रेस में विकल्प तलाशें. तीसरा विकल्प है कि जिस भी पार्टी का मजबूत ब्राह्मण कैंडिडेट हो, उसका समर्थन करें.

इस लोकसभा चुनाव में, इन सात घातक मिथकों से बचें

यह लोकसभा चुनाव मात्र नरेंद्र मोदी या राहुल गांधी को लेकर नहीं है. मतदाता अन्य राजनीतिक दलों या निर्दलीयों का भी समर्थन कर सकते हैं.

हार्दिक के चुनाव लड़ने पर रोक क्या जनांदोलनों की मौत की इबारत है?

अंग्रेजी राज के समय से ही जनांदोलनों में मुकदमा होना या निचली अदालतों में सजा हो जाना कोई दुर्लभ बात नहीं है. निचली अदालतों के आदेश के आधार पर चुनाव लड़ने से अयोग्य करार दिए जाने के कानून पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए.

मत-विमत

वीडियो

राजनीति

देश

भारत-अमेरिका 4 से 5 दिन में द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देकर संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर कर सकते हैं:गोयल

(फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और अमेरिका...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.