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Friday, 6 February, 2026
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उत्तर प्रदेश से लोकसभा चुनाव लड़ रहे कुछेक मुस्लिम उम्मीदवारों के लिए कारगर है वंशवाद

वंशानुगत कनेक्शन के बगैर, मुस्लिम उम्मीदवारों की सफलता के आंकड़े और भी निराशाजनक होते है.

पश्चिम बंगाल में लाल और केसरिया का मिलन क्या गुल खिलाएगा

स्वतंत्र भारत के इतिहास के सबसे हिंसक शासन के खिलाफ असाधारण चुनाव होने जा रहे हैं . इस हालत में बहुत रणनीतिक तरीके से यानी टेक्टीकल तरीके से वोटिंग करनी होगी.

मोदी को टीवी पर राहुल से तीन गुना अधिक समय मिला

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समाचार चैनलों ने 722 घंटों से अधिक समय तक दिखाया गया. वहीं इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को बहुत कम 252 घंटे का समय मिला.

उत्तर प्रदेश के बुनकरों ने कैसे गंवा दिया अपना राजनैतिक नेतृत्व

नोटबंदी ने बुनकरों की कमर तोड़ दी क्योंकि उनका पूरा काम कैश में था. बाकी कसर जीएसटी ने पूरी कर दी, जिसकी पेचीदगियों से निपटने में वे अक्षम हैं. सबसे बुरी बात ये है कि सांप्रदायिकता की राजनीति ने उनकी आवाज भी छीन ली है.

मुस्लिम सांसद, विधायक हमेशा मुसलमानों के लिए काम नहीं करते हैं

मुस्लिमों का पिछड़ापन एक राष्ट्रीय मुद्दा है, जो संसद में मुस्लिम सांसदों की घटती संख्या से अधिक गंभीर समस्या है.

क्या अपने ‘सुपरमैन’ हरभजन पर भरोसा ना करना धोनी को पड़ा भारी?

शार्दुल ठाकुर ने जब क्रुनाल पांड्या को आउट किया तो कॉमेंट्री में लगातार इस बारे में चर्चा हो रही थी कि धोनी किस कदर अपने खिलाड़ियों पर भरोसा करते हैं.

ग्राम्शी, आंबेडकर और लालू: वंचितों की मुक्ति के प्रश्न से टकराती तीन शख्सियतें

ग्राम्शी इटली के वंचितों, गरीबों, सबऑल्टर्न के सवालों पर लगातार मुखर रहे और जेल में भी उनकी आवाज कमजोर नहीं पड़ी. उसी तरह लालू प्रसाद भी भारत में दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के सवाल पर लगातार मुखर रहे हैं.

इस रमजान, न तो रोजे न ही खाने को मजबूर करें, कुरान कहता है कि धर्म में कोई विवशता नहीं होनी चाहिए

बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ख़ुद एक मुसलमान नहीं हैं लेकिन वो नमाज पढ़ती हैं और रोजा भी रखती हैं. बहुतों का कहना है कि वो इस सच्चे दिल से नहीं करतीं और वो ये सब सिर्फ मुस्लिम वोटों के लिए करती हैं.

जाति और वर्ग की दुविधा में विलोप की ओर बढ़ता भारतीय वामपंथ

भारत में वामपंथ के नेतृत्व पर उच्च जातियों का क़ब्ज़ा रहा. जिसकी वजह से उनको जाति की समस्या को न देख पाने की बीमारी लग गयी है. यही वजह है कि जो पार्टी आजादी से लेकर 1962 तक देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी थी, वह विलोप की ओर बढ़ रही है.

अगर मोदी की सत्ता में वापसी नहीं होती तो उसका ज़िम्मेदार विपक्ष नहीं वो खुद होंगे

इस चुनाव अभियान से अगर कुछ स्पष्ट हुआ है तो वह यह है कि मोदी में किसी भी पिच पर बल्लेबाज़ी करने और छक्के लगाने की विलक्षण प्रतिभा है.

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आतिशी वीडियो विवाद: दिल्ली विधानसभा ने पंजाब के डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा

नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने आम आदमी पार्टी (आप) की नेता आतिशी के कथित रूप से ‘छेड़छाड़’ करके...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.