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Saturday, 7 March, 2026
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मत-विमत

बांग्लादेश ने जिस शादी के फॉर्म से ‘वर्जिन’ हटाया वो महिलाओं के खिलाफ बातों से भरा है

बांग्लादेश को समान नागरिक संहिता की ज़रूरत है. पुरुषवादी कानूनों में मामूली फेरबदल से महिलाओं को मामूली मानवाधिकार ही मिल पाएंगे.

मंदी से बचना है तो सरकारी नौकरियों के खाली पदों को भरे सरकार

देश का जो सबसे कमज़ोर तबक़ा है, उसकी क्रयशक्ति में इजाफा केवल मनरेगा जैसी में योजनाओं में ख़र्चा बढ़ाकर किया जा सकता है. शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च भी बढ़ाना होगा.

न्यायपालिका पर दलितों का बढ़ता अविश्वास लोकतंत्र के लिए बुरी खबर

प्रगतिशील कानून बनाने का जिम्मा विधायिका यानी लेजिस्लेचर का है. आखिर उसे ही तो वोट लेने के लिए जनता के बीच जाना होता है और जनता के हितों का ख्याल रखने की उम्मीद उससे ही है.

बसपा बड़े जनांदोलनों वाली पार्टी कभी नहीं रही, फिर मायावती भला रविदास आंदोलन से क्यों जुड़ें?

चंद्रशेखर आज़ाद बनाम मायावती का मीडिया का कथानक खोखला है. दलितों के एक से अधिक नेता हो सकते हैं.

मोदी आलोचकों की तीन ग़लतियां- और इसमे नर्म हिंदुत्व शामिल नहीं

जैसे अमेरिकी उदारवादी यह नहीं देख सकते कि कोई भी ट्रम्प को वोट क्यों देगा, मोदी आलोचक भी उसी जाल में फंस गए हैं. और समस्या की जड़ यही है.

न्यायपालिका को बीमारी से बचाना है तो रिटायर्मेंट के बाद मीलॉर्ड्स को नौकरी का झुनझुना न दें

क्या न्यायमूर्ति गौड़ की पीएमएलए न्यायाधिकरण के अध्यक्ष पद पर नियुक्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है.

रेल से लेकर बाजार तक बिहार मोदीमय है!

मीडिया निरंतर भारत के नागरिकों और वोटरों को भीड़ में तब्दील करता जा रहा है. इस मॉब का काम अब सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी को जिताना मात्र नहीं है, बल्कि अपने बीच से मोदी पैदा करना है.

कहां ले जायेगी प्रेम को जाति व धर्म की नोंक पर रखने वाली पंचायतों की क्रूरता

झारखंड में पलामू जिले की उलडंडा ग्राम पंचायत के मुसुरमू गांव में एक पंचायत ने प्रेम को जाति की नोंक पर रखा तो पुरानी सारी सीमाएं पार करती उसकी क्रूरता ने प्रेम में डूबी एक बेटी के पिता की जान ले ली.

370 लागू होने के बाद और हटने पर भी, बदकिस्मती ‘जन्नत के शिल्पियों’ के ही हिस्से आई है

राज्य में लगभग 20 सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां हैं. जम्मू और कश्मीर खनिज 1960 में खनिज संसाधनों का दोहन करने के लिए शुरू हुआ था. सरकार के अनुसार बीस में सिर्फ चार लाभ में हैं, बाकी नुकसान में हैं.

गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया से क्यों डर रहे हैं चिदंबरम

अच्छा तो यह होता कि पी. चिदंबरम सीबीआई और ईडी अफसरों के साथ चुपचाप चले गये होते. जांच में आगे भी वैसे ही सहयोग करते जैसे किसी भी आरोपित व्यक्ति को करना चाहिए.

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नेपाल में बालेन की लहर कायम, क्या देश को मिलेगा अब तक का सबसे युवा प्रधानमंत्री

बालेंद्र शाह की लोकप्रियता के बावजूद, यह संभावना ज्यादा है कि आरएसपी को साफ बहुमत न मिले, लेकिन नेपाली कांग्रेस को अपने सात दशक पुराने वोटर आधार का फायदा मिल सकता है.

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जयशंकर ने भूटान, श्रीलंका और सेशेल्स के समकक्षों से मुलाकात की

नयी दिल्ली, छह मार्च (भाषा) विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शुक्रवार को श्रीलंका और भूटान के अपने समकक्षों के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ता की...

लास्ट लाफ

सुप्रीम कोर्ट का सही फैसला और बिलकिस बानो की जीत

दिप्रिंट के संपादकों द्वारा चुने गए दिन के सर्वश्रेष्ठ कार्टून.