देश का जो सबसे कमज़ोर तबक़ा है, उसकी क्रयशक्ति में इजाफा केवल मनरेगा जैसी में योजनाओं में ख़र्चा बढ़ाकर किया जा सकता है. शिक्षा और स्वास्थ्य पर सरकारी खर्च भी बढ़ाना होगा.
प्रगतिशील कानून बनाने का जिम्मा विधायिका यानी लेजिस्लेचर का है. आखिर उसे ही तो वोट लेने के लिए जनता के बीच जाना होता है और जनता के हितों का ख्याल रखने की उम्मीद उससे ही है.
मीडिया निरंतर भारत के नागरिकों और वोटरों को भीड़ में तब्दील करता जा रहा है. इस मॉब का काम अब सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी को जिताना मात्र नहीं है, बल्कि अपने बीच से मोदी पैदा करना है.
झारखंड में पलामू जिले की उलडंडा ग्राम पंचायत के मुसुरमू गांव में एक पंचायत ने प्रेम को जाति की नोंक पर रखा तो पुरानी सारी सीमाएं पार करती उसकी क्रूरता ने प्रेम में डूबी एक बेटी के पिता की जान ले ली.
राज्य में लगभग 20 सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयां हैं. जम्मू और कश्मीर खनिज 1960 में खनिज संसाधनों का दोहन करने के लिए शुरू हुआ था. सरकार के अनुसार बीस में सिर्फ चार लाभ में हैं, बाकी नुकसान में हैं.
अच्छा तो यह होता कि पी. चिदंबरम सीबीआई और ईडी अफसरों के साथ चुपचाप चले गये होते. जांच में आगे भी वैसे ही सहयोग करते जैसे किसी भी आरोपित व्यक्ति को करना चाहिए.
बालेंद्र शाह की लोकप्रियता के बावजूद, यह संभावना ज्यादा है कि आरएसपी को साफ बहुमत न मिले, लेकिन नेपाली कांग्रेस को अपने सात दशक पुराने वोटर आधार का फायदा मिल सकता है.