बिहार और हरियाणा की राजनीतिक परंपराएं और आबादी की संरचनाएं अलग हैं. इसलिए तेजस्वी यादव के सामने बीजेपी से हाथ मिलाने का विकल्प ही नहीं है. बीजेपी के लिए भी आरडेजी को साथ लेने का विकल्प नहीं है
कांग्रेस को राष्ट्रीय नेतृत्व की दुविधा से निकलना होगा और जनता के बदलते मूड का फायदा उठाने के लिए अपने को तैयार करना होगा. जनता का सरकार से नाराज होना काफी नहीं है. सिर्फ इस वजह से परिवर्तन नहीं होते
इतिहास को खंगालें तो पता चलेगा कि परंपरा की नींव कांग्रेस ने ही डाली और उसने इंडियन एयरलाइंस के विमान का 1978 में अपहरण करने वाले दो नेताओं को भरपूर सम्मान भी दिया.
लोग स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की दिशा में आगे बढ़ना नहीं चाहते, क्योंकि शायद इन मूल्यों की गारंटी देने वाले नए आधुनिक भारत को लेकर उनके मन में संदेह है. वे अराजकता की ओर नहीं जाना चाहते.
एआईएमआईएम की उपस्थिति अब प्रतीकात्मक मात्र नहीं रह गई है, बल्कि यह पश्चिम से पूरब तक के राज्यों के चुनावों में धर्मनिरपेक्ष दलों द्वारा मुस्लिम मतदाताओं को ब्लैकमेल किए जाने को चुनौती दे रही है.
दिल्ली और आसपास की आबोहवा खराब है. इसकी एक बड़ी वजह आस-पास के राज्यों में किसानों द्वारा धान की फसल की खूंट या पराली को जलाया जाना है. क्या है इसका समाधान?
बीएसपी सिर्फ 12 साल पहले यूपी की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी. लेकिन मायावती के उल्टे पड़ते दांव की वजह से बीएसपी अपने पुराने दिनों की छाया बनकर रह गई है. 2007 के बाद वह लगातार अपनी जमीन गंवा रही हैं.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.