शिवसेना महाराष्ट्र में हिंदुत्व की राजनीति की प्रतिनिधि पार्टी थी. बीजेपी से उसे उसकी जगह से बेदखल कर दिया है. अगर शिवसेना ने अपनी उग्रता पूरी तरह छोड़ दी, तो उसका अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा.
आरसीईपी के 11 देशों के साथ भारत का व्यापार घाटे में चलता है. भारतीय बाजारों में ज्यादा आने वाले विदेशी सामानों के कारण जो नुकसान होता इसका खयाल रखते हुए भारत ने इससे अलग रहने का निर्णय किया है.
आरसीईपी में शामिल न होने का फैसला अपने स्वभाव में राजनीतिक है. शामिल होने पर विपक्ष प्रधानमंत्री के खिलाफ गोलबंद हो जाता- आंदोलन और विपक्षी पार्टियां दोनों ही मोदी के खिलाफ एकजुट हो जाते.
पूर्व न्यायाधीश एस एन ढींगरा ने वकीलों के इस रवैये के लिए जजों और सरकारों को भी जिम्मेदार ठहराया है. जज इसके लिए जिम्मेदार हैं जो वकीलों के खिलाफ कार्रवाई करने से डरते हैं.
अपने किसानों और डेयरी उद्योग के हितों को देखते हुए भारत ने फिलहाल आरसीईपी से बाहर रहने का फैसला किया है. लेकिन क्या ये कदम अपने उद्योग को बचाने के लिए सही है.
पाकिस्तान हम पर 'ईरान जैसा' हमला करने के लिए बेताब होगा, और चीन हमें 'असममित विस्तार' का मौका दिए बिना ही एक हवाई अभियान को अंजाम देने की योजना बना रहा होगा. भारत के पास खुद को बदलने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है.